राजनांदगांव 4 सितंबर 2026। राजनांदगांव में LIC पॉलिसियों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने एक LIC एजेंट को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एजेंट ने पॉलिसीधारकों के वास्तविक पते की जगह अपना पता दर्ज कराया और पुरानी पॉलिसियों को नियमित कराने के बजाय नई पॉलिसियां खुलवाईं। इसके चलते कई पॉलिसियां लैप्स हो गईं और पॉलिसीधारक को करीब 6 लाख 39 हजार 571 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में पेश किया है।
पुलिस के मुताबिक मुकेश सोनकर ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम से LIC एजेंट देवेन्द्र सोनकर के माध्यम से कई बीमा पॉलिसियां ली थीं। 7 अप्रैल 2026 को जब उन्होंने LIC कार्यालय पहुंचकर पॉलिसियों की जानकारी ली, तब कथित तौर पर उन्हें इस गड़बड़ी का पता चला। शिकायत के अनुसार, आरोपी एजेंट ने कुछ नई पॉलिसियों में पॉलिसीधारक के पते की जगह अपना पता दर्ज कराया था। वहीं पुरानी पॉलिसियों को नियमित नहीं कराया गया, जिससे वे लैप्स हो गईं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि एजेंट ने योजनाबद्ध तरीके से पुरानी पॉलिसियों को जारी रखने के बजाय नई पॉलिसियां खुलवाईं। इन नई पॉलिसियों में कथित तौर पर उसका अपना पता दर्ज था। इस प्रक्रिया के चलते पॉलिसीधारक को आर्थिक नुकसान हुआ। मामले की जांच के बाद बसंतपुर थाने में आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 316(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अंकिता शर्मा के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के निर्देशन में थाना प्रभारी निरीक्षक कौशलेश देवांगन के नेतृत्व में टीम ने आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस ने आरोपी देवेन्द्र सोनकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में पेश किया गया।
मामले में पुलिस पॉलिसियों से जुड़े दस्तावेजों और आरोपी द्वारा कथित तौर पर किए गए बदलावों की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कितनी पॉलिसियों में इस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई और इससे पॉलिसीधारकों को कितना नुकसान हुआ। पुलिस के मुताबिक, मामले में सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला पॉलिसीधारकों के लिए भी एक अहम सवाल खड़ा करता है कि बीमा पॉलिसियों की जानकारी, पता और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड समय-समय पर संबंधित कंपनी से सत्यापित किए जाएं।


