बिलासपुर 17 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहले से चर्चित दुर्ग लोकसभा चुनाव विवाद ने एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें भाजपा सांसद विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी। अब इस फैसले के बाद विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।
जानकारी के मुताबिक पूरा मामला वर्ष 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। इसके बाद भूपेश बघेल की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश कर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। इस आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी हवाला दिया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को इस पर आदेश सुनाया और भूपेश बघेल का आवेदन नामंजूर कर दिया।
मामले में 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे साक्ष्य दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि इसी दौरान भूपेश बघेल की ओर से आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके चलते उस दिन साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है विवाद
यह मामला केवल हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रहा है। इससे पहले अगस्त 2026 में भूपेश बघेल की ओर से दायर एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। इसके बाद हाईकोर्ट में चुनाव याचिका से जुड़ी साक्ष्य प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुला था। इस आदेश का तत्काल राजनीतिक अर्थ यह है कि 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव को लेकर भूपेश बघेल और विजय बघेल के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
विजय बघेल की चुनाव याचिका अब प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं हुई और आगे अदालत में साक्ष्य तथा अन्य न्यायिक कार्यवाही हो सकती है। यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेता छत्तीसगढ़ की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं और दुर्ग लोकसभा चुनाव में आमने-सामने रहे थे। हाईकोर्ट का ताजा आदेश इस विवाद को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा भूपेश बघेल की अर्जी खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि विजय बघेल की चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप अदालत ने सही मान लिए हैं।
उन दावों पर आगे साक्ष्य और सुनवाई के बाद ही न्यायिक निष्कर्ष सामने आएगा। अब हाईकोर्ट में विजय बघेल की चुनाव याचिका पर साक्ष्य दर्ज करने और आगे की सुनवाई की प्रक्रिया जारी रह सकती है। यानी दुर्ग लोकसभा चुनाव को लेकर शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई अभी अपने अंतिम पड़ाव पर नहीं पहुंची है। सियासी तौर पर भी यह फैसला महत्वपूर्ण है—क्योंकि चुनावी मैदान में खत्म हो चुकी लड़ाई अब अदालत के मैदान में आगे बढ़ती नजर आ रही है।


