रायपुर 17 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में भाजपा की ओर से बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाना है। इसकी शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगी। प्रदेश में लाखों दीये जलाने के साथ रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता और दूसरी जनसेवा गतिविधियों की तैयारी की गई है। इसी बीच इन आयोजनों को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा के कार्यक्रमों पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन सवाल उठाया कि अगर आयोजन में मुख्यमंत्री, विभागीय अधिकारी और कलेक्टर स्तर पर तैयारियां हो रही हैं तो खर्च का भुगतान किस मद से किया जा रहा है ?
गौरतलब है कि आज 17 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर बीजेपी शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर तैयारी की गयी है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में भी प्रदेशव्यापी तैयारियां की गयी है।भाजपा की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर पूरे छत्तीसगढ़ में करीब 36 लाख ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाने की तैयारी है। प्रत्येक बूथ पर कम से कम 100 दीये जलाने का लक्ष्य बताया गया है। रायपुर में करीब 25 लाख दीये जलाने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास से लेकर भगत सिंह चौक, पुराने मंत्री बंगले, तेलीबांधा-मरीन ड्राइव और कलेक्ट्रेट क्षेत्र तक करीब 13 किलोमीटर के रूट पर दीप प्रज्ज्वलन की योजना बताई गई है।
सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि दूसरे जिलों में भी बड़े स्तर पर कार्यक्रमों की तैयारी है। उदाहरण के तौर पर रायगढ़ में 5 लाख दीये जलाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की भी अपील की है। सरकार और भाजपा की ओर से इस अभियान को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने और सेवा-जनभागीदारी से जोड़कर पेश किया जा रहा है। अभियान के दौरान रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और अन्य सेवा गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। जिला स्तर पर भी इन कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां और संगठनात्मक बैठकें की गई हैं।
भूपेश बघेल का सवाल- कार्यक्रम भाजपा का या सरकार का ?
इसी आयोजन को लेकर भूपेश बघेल ने एक्स पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन भाजपा अपने स्तर पर मनाती है तो उन्हें इस पर आपत्ति नहीं है। लेकिन अगर मुख्यमंत्री बैठक लेते हैं, विभाग प्रमुखों और कलेक्टरों को कार्यक्रम की तैयारियों में लगाया जाता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि आयोजन सरकारी है या राजनीतिक। बघेल ने खास तौर पर दीये, बाती और तेल की खरीद के खर्च को लेकर सवाल किया है। उन्होंने पूछा है कि यदि सरकारी संसाधनों से यह आयोजन हो रहा है तो खर्च किस बजट मद से किया जाएगा और इसका हिसाब कौन देगा ?
उन्होंने यह भी कहा कि…..अगर सरकारी धन खर्च किया गया है तो संबंधित विभागों के सचिवों और कलेक्टरों से विधानसभा में खर्च का विवरण मांगा जा सकता है। कांग्रेस की आपत्ति का केंद्र सिर्फ प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाना नहीं, बल्कि सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का सवाल है। पार्टी का तर्क है कि यदि कार्यक्रम भाजपा का संगठनात्मक आयोजन है तो उसका खर्च पार्टी स्तर पर होना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा और राज्य सरकार इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ और जनभागीदारी का कार्यक्रम बता रहे हैं। मुख्यमंत्री की अपील भी प्रदेशवासियों से इसमें भाग लेने को लेकर है।
अब असली सवाल खर्च के हिसाब पर
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में होने वाला ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है। एक तरफ भाजपा इसे सेवा और जनभागीदारी से जोड़ रही है, तो कांग्रेस सरकारी अधिकारियों की भूमिका और आयोजन के खर्च को लेकर सवाल उठा रही है। हालांकि किस विभाग के बजट से कितनी राशि खर्च होगी, दीये-बाती-तेल की खरीद किस एजेंसी के जरिए होगी और इसमें सरकारी धन का कितना इस्तेमाल होगा…इसका पूरा आधिकारिक खर्च विवरण अभी सामने नहीं आया है। इसलिए कांग्रेस के सवालों का अंतिम जवाब संबंधित विभाग या जिला प्रशासन के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार कांग्रेस के इन सवालों पर क्या जवाब देती है और ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के खर्च का आधिकारिक हिसाब किस तरह सामने आता है।


