रायपुर 16 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत फिर गरमा गई है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने फैसला सुनाया। दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने झीरम घाटी हमले की कथित बड़ी साजिश की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि….अदालत का फैसला आने के बावजूद उनकी पार्टी की यह धारणा नहीं बदली है कि मामले में न्याय अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।
झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में नक्सलियों के पैदल पियादों को दी गई सज़ा न अनुपातिक है और न इसे न्याय कहा जा सकता है.
जिन्होंने षडयंत्र रचा और जिन्होंने इस जनसंहार को अंजाम दिया वे तो अभी भी बाहर खुले घूम रहे हैं.
नक्सलियों के बड़े नेताओं का नाम, पता नहीं किसके इशारे पर, एनआईए ने पहले ही हटा दिए थे. उन पर तो आरोप भी नहीं लगाया गया.
न एनआईए ने षडयंत्र की जांच की, न जांच आयोग ने इसकी जांच की.
भाजपा के नेता लगातार अडंगा अटकाते रहे और जांच नहीं होने दी.अदालत के फ़ैसले से हमारी सोच बदलने का प्रश्न ही नहीं है. हम अब भी मानते हैं कि न्याय अधूरा है क्योंकि जांच अधूरी है.
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) September 16, 2026
भूपेश बघेल ने अपने बयान में कहा कि झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में जिन लोगों को सजा दी गई है, वे उनके मुताबिक हमले को अंजाम देने वाले नक्सली तंत्र के निचले स्तर के लोग हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने कथित तौर पर षडयंत्र रचा और जिनके इशारे पर हमला हुआ, वे अब भी बाहर क्यों हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि नक्सलियों के बड़े नेताओं के नाम एनआईए की जांच से हटा दिए गए और उनके खिलाफ आरोप भी नहीं लगाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनआईए ने कथित राजनीतिक षडयंत्र के पहलू की जांच नहीं की।
ये आरोप कांग्रेस और भूपेश बघेल के राजनीतिक दावे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न तो एनआईए ने कथित षडयंत्र की जांच की और न ही जांच आयोग इस पहलू तक पहुंच सका। उन्होंने भाजपा नेताओं पर भी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। बघेल के मुताबिक, अदालत के फैसले से कांग्रेस की यह मांग खत्म नहीं होती कि झीरम घाटी हमले के पीछे की पूरी साजिश की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि “न्याय अधूरा है क्योंकि जांच अधूरी है।”
अदालत ने 10 दोषियों को सुनाई मृत्युदंड की सजा
दूसरी ओर, न्यायिक प्रक्रिया में एनआईए की विशेष अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद बुधवार को उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में नक्सलियों ने काफिले पर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 बताई गई है।
कांग्रेस के सवाल सिर्फ सजा तक सीमित नहीं
झीरम मामले में कांग्रेस की ओर से अब मुख्य सवाल यह उठाया जा रहा है कि अदालत से दोषियों को सजा मिलने के बाद क्या हमले के पीछे की कथित व्यापक साजिश भी सामने आई है। यानी राजनीतिक विवाद का केंद्र अब केवल 10 दोषियों को मिली सजा नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या जांच एजेंसियां हमले के पीछे कथित साजिश, बड़े नक्सली नेतृत्व और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका तक पहुंच पाईं। वहीं, अदालत का फैसला अपने आप में न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है और जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उन्हें हाईकोर्ट में अपील का अधिकार दिया गया है। दूसरी तरफ कांग्रेस द्वारा उठाए गए षडयंत्र और जांच से जुड़े सवालों पर सरकार तथा भाजपा की प्रतिक्रिया भी इस राजनीतिक बहस का अगला अहम हिस्सा होगी


