रायपुर 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में आने वाले तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासी और पर्यावरणीय विवाद और गहरा गया है। कोयला मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में जहां तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राज्य सरकार की पुरानी आपत्ति और बाद में राज्य सरकार की ओर से नीलामी के लिए किए गए अनुरोध का हवाला दिया गया है, वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला ने मंत्रालय की सफाई पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। हसदेव अरण्य को लंबे समय से बचाने के लिए अभियान चला रहे आलोक शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कई सवाल पूछे हैं। उन्होने सवाल उठाते हुए लिखा कि….2023 चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में हसदेव को बचाने का संकल्प लिया था, क्या एक पूँजीपति अदानी के लिए आप छत्तीसगढ़ के आदिवासीए यहाँ के समृद्ध जंगल, पर्यावरण, वन्य प्राणी, मिनीमाता बांगो जलाशय सबका विनाश कर देंगे ?
आज @CoalMinistry ने विज्ञप्ति जारी करते हुए लिखा है –
वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार ने हसदेव के तारा कोल ब्लॉक को नीलामी से बाहर रखने पत्र लिखा था क्यूंकि यह लेमरू हाथी रिजर्व से लगा हुआ क्षेत्र हैं।हालांकि मंत्रालय को यह भी बताना था कि राज्य सरकार की वह आपत्ति सिर्फ लेमरू हाथी रिजर्व की नहीं बल्कि यह भी थी कि इस ब्लॉक 15.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बहुत ही घना वन क्षेत्र है (VDF) और विधानसभा का संकल्प है कि हसदेव के सभी कोल ब्लॉक निरस्त किए जाए l
विज्ञप्ति में कहा गया कि अभी नीलामी इसलिए की गई क्यूंकि 11 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार ने पत्र लिखकर तारा कोल ब्लॉक को नीलाम करने का निवेदन किया l
अब मुख्यमंत्री @vishnudsai जी को छत्तीसगढ़ की जनता को बताना चाहिए कि 26 जुलाई 2022 का छत्तीसगढ़ विधानसभा का संकल्प जिसमे हसदेव के सभी कोल ब्लॉक निरस्त करने का निर्णय था उसकी अवमानना करके और पूर्व @bhupeshbaghel सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करके आपने हसदेव के समृद्ध जंगल का विनाश क्यो करवा रहे हैं?
जबकि इसी जंगल को बचाने के लिए पिछले 12 सालों से हसदेव के आदिवासी और छत्तीसगढ़ के पर्यावरणीय संवेदनशील नागरिक आंदोलन कर रहे हैं और 2023 चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में हसदेव को बचाने का संकल्प लिया था l
क्या एक पूँजीपति अदानी के लिए आप छत्तीसगढ़ के आदिवासी, यहाँ के समृद्ध जंगल, पर्यावरण, वन्य प्राणी , मिनीमाता बांगो जलाशय सबका विनाश कर देंगे ?
#Savehasdeo— Alok Shukla (@alokshuklacg) September 11, 2026
गौरतलब है कि हसदेव अरण्य के जंगलों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ में पिछले लंबे वक्त से आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन में पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला के साथ ही स्थानीय आदिवासी जल-जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे है। बावजूद इसके अब हसदेव अरण्य में आने वाले तारा कोल ब्लाॅक की नीलामी अडाणी समूह की कंपनी को किये जाने के बाद एक बार फिर सूबे की सियासत गरमा गयी है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर बनी हुई है। वहीं अब पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला ने भी इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाया है। आलोक शुक्ला के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक के करीब 15.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बहुत घना वन क्षेत्र (VDF) मौजूद है। 2023 में राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्र में तारा समेत कुछ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी।
वर्ष 2023 में केंद्र ने तारा कोल ब्लॉक को नीलामी प्रक्रिया से वापस भी लिया था। उस समय उपलब्ध रिपोर्टों में तारा ब्लॉक के वन क्षेत्र का करीब 81 फीसदी होना और 15.96 वर्ग किमी बहुत घने वन क्षेत्र का उल्लेख किया गया था।आलोक शुक्ला ने सरकार से सवाल पूछा है कि यदि उस समय पर्यावरणीय और वन क्षेत्र को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति थी, तो बाद में ऐसा क्या बदला कि तारा ब्लॉक की नीलामी का रास्ता फिर खुल गया ? आलोक शुक्ला ने कोयला मंत्रालय की विज्ञप्ति में बताए गए 11 दिसंबर 2025 के राज्य सरकार के पत्र को भी अपने सवालों का केंद्र बनाया है। उनके मुताबिक मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकार ने इस पत्र के जरिए तारा कोल ब्लॉक की नीलामी का अनुरोध किया था। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सवाल किया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा हसदेव के सभी कोल ब्लॉकों को निरस्त करने को लेकर पारित संकल्प और बाद में बदले रुख के बीच आखिर क्या वजह रही ?
हसदेव के जंगल और आदिवासी अधिकारों को लेकर चिंता
आलोक शुक्ला ने अपने बयान में कहा कि हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामला सिर्फ एक कोल ब्लॉक की नीलामी का नहीं, बल्कि जंगल, आदिवासी आजीविका, वन्यजीव और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा है। हसदेव क्षेत्र में कोयला खनन को लेकर पिछले कई वर्षों से विरोध और राजनीतिक टकराव जारी है। तारा कोल ब्लॉक को लेकर भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कांग्रेस की ओर से विरोध सामने आया है। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेता पहले ही दावा कर चुके हैं कि इस क्षेत्र में खनन से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो सकती है और लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास वन्यजीवों के आवागमन पर असर पड़ सकता है। जयराम रमेश ने भी तारा ब्लॉक को करीब 5,000 एकड़ में फैला बताते हुए 4,000 एकड़ से अधिक घने जंगल और 10 लाख से अधिक पेड़ों की संभावित कटाई का दावा किया है।
सवाल सिर्फ कोयले का नहीं, हसदेव के भविष्य का भी
आलोक शुक्ला ने मुख्यमंत्री साय से सवाल किया है कि क्या एक बड़े औद्योगिक हित के लिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी, जंगल, पर्यावरण, वन्यजीव और मिनीमाता बांगो जलाशय से जुड़े हितों की अनदेखी की जाएगी ? उनका इशारा सीधे सरकार की उस नीति पर है, जिसमें एक ओर हसदेव को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं की बात होती रही है और दूसरी ओर तारा जैसे ब्लॉक की नीलामी आगे बढ़ी है। तारा कोल ब्लॉक को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि 2023 में जिस ब्लॉक को पर्यावरणीय और वन संबंधी कारणों से नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी, उसी ब्लॉक की नीलामी के लिए 2025 में राज्य सरकार की ओर से कथित तौर पर अनुरोध क्यों किया गया ? दूसरी तरफ पर्यावरण कार्यकर्ताओं का सवाल है कि हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए वर्षों से चल रहे आंदोलन और विधानसभा के पुराने संकल्प का अब क्या महत्व रह गया है। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी ने एक बार फिर हसदेव के जंगल बनाम खनन और विकास की बहस को केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य सरकार आलोक शुक्ला द्वारा उठाए गए इन सवालों पर क्या जवाब देती है।


