बिलासपुर 9 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में सड़कों की बदहाली को लेकर राज्य सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। वर्ष 2021 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शपथपत्रों में सड़कों की स्थिति बेहद खराब बताई गई है, लेकिन अब तक ठोस सुधार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में उपस्थित होने या निगम की ओर से उचित प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने सेंदरी-मोपका बाईपास की स्थिति और बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को लेकर भी जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होगी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सेंदरी-मोपका बाईपास को लेकर NHAI के शपथपत्र में बताया गया कि सड़क अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को हस्तांतरित नहीं की गई है। यह सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकार क्षेत्र में है और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार के विभाग की है। इस स्थिति पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने मामले में लोक निर्माण विभाग के सचिव का शपथपत्र पेश करने के लिए समय मांगा। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अगली सुनवाई में खुद उपस्थित होने या निगम की ओर से उचित प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं होने पर अदालत ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
अदालत ने आयुक्त से अपने क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शपथपत्र के जरिए देने को कहा है। आगामी पूजा पर्व को देखते हुए सड़क सुधार की कार्रवाई पर भी जानकारी मांगी गई है। मामले में न्याय मित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसे ठीक से चलने योग्य कहा जा सके। उन्होंने आशंका जताई कि पूजा पर्व से पहले सड़कों की मरम्मत नहीं हुई, तो लोगों को परेशानी के साथ दुर्घटनाओं का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने नगर निगम से तत्काल सड़कों को चलने लायक बनाने की मांग की।
बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना पर भी मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को पूरा करने में लगने वाले समय की जानकारी मांगी है। इसके लिए रायपुर और बिलासपुर के परियोजना अधिकारियों को शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत यह जानना चाहती है कि परियोजना पूरी करने की समय-सीमा क्या है। बिलासपुर में नगर निगम की पांच प्रमुख सड़कों का काम डामरीकरण के चरण में पहुंच गया है, लेकिन डामर की कीमत बढ़ने के कारण परियोजनाओं पर पेंच फंस गया है। ठेकेदारों ने स्वीकृत एस्टीमेट में संशोधन की मांग की है। यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और आगे का फैसला शासन के निर्देशों के आधार पर होगा। करीब 12 किलोमीटर लंबी इन पांच सड़कों की अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई गई है। इनमें अशोक नगर रोड, साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी रोड, अपोलो रोड, स्मृति वन-शनि मंदिर रोड और अरपा अटल पथ शामिल हैं। एस्टीमेट में संशोधन होने पर इन परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है।
14 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से सड़कों की स्थिति तथा मरम्मत कार्यों पर जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि सड़कों को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा क्या तय की गई है। वर्ष 2021 से चल रही जनहित याचिका के बावजूद सड़कों की बदहाली का मुद्दा बने रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें 14 अक्टूबर की सुनवाई पर हैं, जहां नगर निगम और राज्य सरकार को अपनी कार्रवाई का ब्योरा देना होगा।


