हरिद्वार 15 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव के एक बयान ने देश की मौजूदा राजनीति और व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रामदेव ने सरकारी भर्तियों में कथित भ्रष्टाचार, इंटरव्यू प्रक्रिया में गड़बड़ी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने की नसीहत दी। रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में सरकारी भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ शिक्षा और रोजगार से जुड़ी टिप्पणी के तौर पर नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल पर एक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक योगगुरू बाबा रामदेव का ये बयान उत्तराखंड के हरिद्वार में सामने आया। जहां उन्होने पतंजलि योगपीठ में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मीडिया से चर्चा करते हुए देश में चल रहे आंदोलन पर चिंता जताते हुए बड़ा बयान दे दिया। बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इंटरव्यू के दौरान बड़े स्तर पर गड़बड़ियां होती हैं और कई बार पहले से चयन तय कर अपने लोगों को फायदा पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करने की बात भी कही।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर चिंता
योगगुरु बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि देश के कई हिस्सों में बच्चों को शिक्षक, पानी, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने नकल और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत किए बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। बाबा रामदेव ने राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती तल्खी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और विपक्ष को भी सत्ता का सम्मान करना चाहिए। उनका संदेश साफ था कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन मतभेदों को दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।
जाति-धर्म की राजनीति पर भी बोले रामदेव
बाबा रामदेव ने जाति, वर्ग और समुदाय के नाम पर समाज में विभाजन और नफरत से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के सामने बाहरी चुनौतियां भी हैं और ऐसे में सामाजिक एकता जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समुदाय में अगर कोई कानून तोड़ता है तो उसके खिलाफ संविधान के दायरे में कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीति में क्यों अहम है रामदेव का बयान
रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर उनके आरोप सरकारों के लिए जवाबदेही का सवाल खड़ा करते हैं। खास बात यह है कि रामदेव ने केवल सरकार पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को संवाद और संयम की सलाह दी है। इसलिए उनके बयान को किसी एक राजनीतिक खेमे के समर्थन या विरोध के बजाय व्यवस्था में सुधार और राजनीतिक टकराव कम करने के संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। अब बड़ा सवाल यही है कि रामदेव के इन तीखे सवालों पर सरकारें क्या जवाब देती हैं और क्या भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक तथा शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक एजेंडे के और केंद्र में आते हैं।


