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    Home»राजनीति»पूजा-पाठ में ‘अक्षत’ का क्यों है इतना बड़ा महत्व? जानें खंडित चावल चढ़ाने से क्यों रुष्ट हो जाते हैं भगवान
    राजनीति

    पूजा-पाठ में ‘अक्षत’ का क्यों है इतना बड़ा महत्व? जानें खंडित चावल चढ़ाने से क्यों रुष्ट हो जाते हैं भगवान

    DW HindiBy DW Hindi09/06/2026Updated:11/06/2026
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    Know why offering broken rice makes God angry
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     जानें खंडित चावल चढ़ाने से क्यों रुष्ट हो जाते हैं भगवान —काशी. हिंदू सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, हवन या दैनिक पूजा-पाठ में अक्षत यानी साबुत चावल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, अक्षत के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता। अक्सर लोग अज्ञानतावश पूजा में टूटे हुए चावलों का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिसे ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में पूरी तरह वर्जित बताया गया है।

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    अक्षत का अर्थ और इसका धार्मिक महत्व

    शास्त्रों के अनुसार, अक्षत शब्द का निर्माण ‘अ’ और ‘क्षत’ से हुआ है, जिसका सीधा अर्थ है “जो खंडित न हो”। पूजा में हमेशा साफ, स्वच्छ और अखंडित (साबुत) चावल ही भगवान को अर्पित किए जाते हैं। अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पूजा के दौरान किसी सामग्री की कमी रह जाए, तो उसके स्थान पर ‘इदं अक्षतं समर्पयति’ कहकर चावल चढ़ाने से वह कमी पूरी हो जाती है। चावल का रंग सफेद होता है और सफेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है।

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    क्यों वर्जित है खंडित चावल? जानें पौराणिक नियम

    सनातन धर्म में देवताओं को हमेशा सर्वश्रेष्ठ और पूर्ण वस्तुएं ही अर्पित करने का विधान है। खंडित या टूटे हुए चावल को अशुद्ध और अपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष विदों के अनुसार, खंडित अन्न चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और इससे घर में दरिद्रता आती है।

    अक्षत चढ़ाने के मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

    • चावल धोकर चढ़ाएं: भगवान को अक्षत अर्पित करने से पहले उन्हें साफ पानी से धो लेना चाहिए। सूखे और धूल लगे चावल चढ़ाना अनुचित माना जाता है।
    • हल्दी या कुमकुम का प्रयोग: अक्षत को कभी भी पूरी तरह सूखा या सादा नहीं चढ़ाना चाहिए। इसमें थोड़ा सा गीला कुमकुम या हल्दी मिलाकर इसे पीला या लाल कर लेना शुभ होता है।
    • शिवजी को विशेष प्रिय: भगवान शिव को अक्षत विशेष रूप से प्रिय हैं। शिवपुराण के अनुसार, महादेव पर अखंडित चावल चढ़ाने से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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    श्रद्धालुओं के लिए व्यावहारिक सुझाव

    वाराणसी के स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि घरों में पूजा की थाली तैयार करते समय सबसे पहले चावलों को बीनकर टूटे हुए दानों को अलग कर देना चाहिए। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर अक्षत की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यदि आप मंदिर जा रहे हैं, तो घर से ही साफ अक्षत लेकर निकलें, क्योंकि बाजार में मिलने वाली रेडीमेड पूजा थैलियों में अक्सर खंडित चावल होते हैं।

     

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