रायपुर11 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। बघेल ने सवाल उठाया कि जब देश की राष्ट्रपति आदिवासी महिला हैं और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी आदिवासी हैं, तो फिर विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को बधाई देने तक में सरकार पीछे क्यों रही ? बघेल ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के दौरान 9 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था और प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, लेकिन मौजूदा सरकार में आदिवासी दिवस को लेकर वैसा उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है।
गौरतलब है कि हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में यह दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। लेकिन इस बार विश्व आदिवासी दिवस को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार के साथ-साथ बीजेपी की आदिवासी राजनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। बघेल के बयान के बाद विश्व आदिवासी दिवस अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
बघेल ने इसे लेकर बीजेपी की आदिवासी राजनीति पर सवाल खड़े किए। बीजेपी और मुख्यमंत्री साय पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि….“देश की राष्ट्रपति आदिवासी महिला हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री भी आदिवासी हैं फिर भी मुख्यमंत्री जी “विश्व आदिवासी दिवस” पर आदिवासी समाज को एक ट्वीट तक करके बधाई नहीं दे पाए.” भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में मुख्यमंत्री की निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने ही कार्यक्रमों के लिए भी ‘ऊपर’ से अनुमति लेनी पड़ती है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और RSS की कार्यशैली पर हमला माना जा रहा है।
बघेल ने सवाल उठाया कि अगर आदिवासी समाज के नाम पर राजनीति की जाती है, तो उसके पर्व और अधिकारों के मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकता क्यों नहीं दिखाई देती ? बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान प्रदेशभर में आदिवासी समाज के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे और उनकी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों को लेकर चर्चा होती थी।
आदिवासी मुद्दे पर फिर आमने-सामने कांग्रेस-BJP
भूपेश बघेल के इस बयान के बाद विश्व आदिवासी दिवस एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस बनाम बीजेपी के मुद्दे में बदलता नजर आ रहा है। कांग्रेस जहां बीजेपी सरकार की आदिवासी नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी की ओर से बघेल के आरोपों पर पलटवार की संभावना है। कुल मिलाकर, आदिवासी मुख्यमंत्री और आदिवासी राष्ट्रपति के मुद्दे को केंद्र में रखकर भूपेश बघेल ने बीजेपी की आदिवासी राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं भूपेश बघेल के सवाल पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने पलटवार किया है। उन्होने कहा कि…..कांग्रेस के मार्गदर्शन हम क्यों लेंगे कि कौन सा दिवस मनाना है और कौन सा दिवस नहीं मनाना है ? चंद्राकर ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि….नक्सल समस्या छत्तीसगढ़ में लाकर आदिवासियों को मरवाने के अलावा कांग्रेस ने कुछ भी नहीं किया। जनजाति आयोग अटलजीं ने बनाया, उसको कानूनी संरक्षण दिया, कांग्रेस ने किया क्या है आदिवासियों के लिए ?


