कोरबा 22 सितंबर 2026। औद्योगिक नगरी कोरबा में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मल्टीलेवल पार्किंग के इस्तेमाल को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस मल्टीलेवल पार्किंग से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होने की उम्मीद जताई गई थी, लोकार्पण के दो महीने बाद भी उसकी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। 23 जुलाई को डिप्टी सीएम और जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने इस मल्टीलेवल पार्किंग का लोकार्पण किया था। उस समय अधिकारियों की ओर से पार्किंग के उपयोग से शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होने की बात कही गई थी। लेकिन दो महीने गुजरने के बाद भी पार्किंग में गिनी-चुनी गाड़ियां ही नजर आ रही हैं, जबकि शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव और जाम की समस्या बनी हुई है।
करोड़ों रूपये की लागत से बने इस मल्टीलेवल पार्किंग के लोकार्पण के ठीक दो महीने बाद आज मंगलवार को डिप्टी सीएम अरूण साव कोरबा प्रवास पर पहुंचे थे। कलेक्टर कार्यालय में समीक्षा बैठक के बाद जब मीडिया ने जनहित के इस मुद्दे पर डिप्टी सीएम अरुण साव से सवाल किया गया। मीडिया ने उनसे पूछा कि आपके लोकार्पण के दो महीने बाद भी मल्टीलेवल पार्किंग की उपयोगिता साबित नहीं हो पा रही है। इस सवाल पर डिप्टी सीएम कुछ सेकेंड के लिए थोड़ा असहज हुए और फिर उन्होंने इसे नई योजना बताते हुए कहा कि…. धीरे-धीरे लोगों को इसकी जानकारी होगी। उन्होंने इस जानकारी पर संज्ञान लेने की भी बात कही। और कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पार्किंग का उपयोग बढ़ने पर निश्चित रूप से शहर की यातायात व्यवस्था दुरुस्त होगी और वे इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी लेंगे।
करोड़ों की पार्किंग, लेकिन इस्तेमाल गिनी-चुनी गाड़ियों का
नगर निगम की ओर से करीब 15 करोड़ रूपये से ज्यादा की लागत से तैयार की गई इस मल्टीलेवल पार्किंग का उद्देश्य शहर में सड़क किनारे होने वाली पार्किंग का दबाव कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाना था। लेकिन मौजूदा स्थिति में पार्किंग के भीतर अधिकांश हिस्से खाली नजर आ रहे हैं। हमारी टीम ने मौके पर पहुंचकर पार्किंग की हकीकत जानने का प्रयास किया। पार्किंग स्थल के गेट पर ठेकेदार का बोर्ड लगा मिलाए जिसमें अलग.अलग प्रकार के वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग शुल्क का भी उल्लेख किया गया था। लेकिन मौके पर पार्किंग परिसर में महज 4 से 5 चार पहिया वाहन ही खड़े नजर आए। मौके पर मौजूद स्टाफ से जब पार्किंग के संचालन को लेकर जानकारी ली गईए तो उसने बताया कि करीब एक महीने पहले ही पार्किंग का संचालन शुरू हुआ है। फिलहाल यहां जो भी 4-5 वाहन खड़े है, वे सभी मासिक पास वाले वाहन ही हैं, जबकि अन्य वाहन कभी-कभार ही पार्किंग में आते हैं।
सालों तक अधूरा रहा काम, दोबारा टेंडर के बाद हुआ पूरा
यह मल्टीलेवल पार्किंग पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। निर्माण कार्य लंबे समय तक अधूरा पड़ा रहा। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद नगर निगम ने दोबारा निविदा जारी कर शेष काम पूरा कराया। काम पूरा होने के बाद 23 जुलाई को इसका लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन अब दो महीने बाद स्थिति यह है कि पार्किंग की इमारत तो तैयार है, लेकिन उसे शहर की यातायात व्यवस्था का हिस्सा बनाने की कवायद जमीन पर प्रभावी नजर नहीं आ रही है।
पार्किंग खाली, सड़कें जाम… सवाल प्लानिंग पर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर शहर में पार्किंग की समस्या को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर मल्टीलेवल पार्किंग तैयार की गई, तो आम लोगों को वहां तक लाने और फिर पार्किंग से बाजार तक आसानी से पहुंचाने की क्या व्यवस्था बनाई गई ? क्या पार्किंग के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार हुआ ? क्या बाजार क्षेत्र में सड़क किनारे पार्किंग को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनाई गई ?
क्या वाहन चालकों को मल्टीलेवल पार्किंग की ओर डायवर्ट करने के लिए पर्याप्त संकेतक और ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया ?
और सबसे अहम सवाल—लोकार्पण के बाद पार्किंग को पूरी क्षमता से संचालित करने की जिम्मेदारी किसकी है ?
जिसका मकसद जाम कम करना था, वही पार्किंग वीरान क्यों ?
कोरबा में एक तरफ सड़क पर वाहनों का दबाव है और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पार्किंग का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है। ऐसे में इस परियोजना की उपयोगिता, संचालन व्यवस्था और निर्माण के बाद की प्लानिंग पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकारी परियोजना का मकसद सिर्फ भवन तैयार कर उसका लोकार्पण करना नहीं, बल्कि उसे आम लोगों के लिए उपयोगी बनाना भी है। अब देखने वाली बात होगी कि डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद नगर निगम के अधिकारी पार्किंग के संचालन और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं] ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। फिलहाल डिप्टी सीएम के लोकार्पण के दो महीने बाद भी करोड़ों रूपये की लागत से बना मल्टीलेवल पार्किंग मौजूदा वक्त में सफेद हाथी साबित हो रहा है।


