रायपुर 6 सितंबर 2026। झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद जगदलपुर की विशेष NIA अदालत द्वारा सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच के दायरे और झीरम हमले के पीछे के कथित बड़े सवालों को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने झीरम घाटी हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए तत्कालीन CM-गृहमंत्री, DGP और CS के साथ-साथ सरेंडर कर चुके नक्सली नेताओं का भी नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। बैज ने कहा है कि अगर झीरम की पूरी सच्चाई सामने लानी है तो जांच किसी एक दिशा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही जगदलपुर की एनआईए कोर्ट ने झीरम हमले में फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थीए इनमें एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए थे। 10 अगस्त को अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट के इस फैसले को लेकर एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हो गयी है। दीपक बैज ने वर्ष 2013 में प्रदेश में सत्ता में रही भाजपा सरकार के तत्कालीन प्रमुख जिम्मेदारों के नार्को टेस्ट की मांग की है। उस समय डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री, ननकीराम कंवर गृहमंत्री, रामनिवास तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) और सुनील कुमार मुख्य सचिव के पद पर थे।
बैज का कहना है कि झीरम हमले से जुड़े तमाम सवालों का निष्पक्ष जवाब सामने आना चाहिए और इसके लिए उस समय शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रमुख अधिकारियों और तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व से भी पूछताछ की जरूरत है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सिर्फ तत्कालीन भाजपा सरकार के लोगों के नार्को टेस्ट की मांग नहीं की है, बल्कि सरेंडर कर चुके नक्सली नेताओं का भी नार्को टेस्ट कराने की बात कही है, जिनका इस बड़े हमले में भूमिका रही है। दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार इस मामले को हमेशा दबाने के लिए काम करती रही है। कभी तो जांच आयोग के खिलाफ बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष ने स्टे ले लिया। कांग्रेस सरकार ने एसआईटी का गठन किया, तब एनआईए कोर्ट चली गयी। दीपक बैज ने इस बड़ा षड़यंत्र बताते हुए बीजेपी पर गंभीर सवाल उठाये है।
आपको बता दे झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को दरभा क्षेत्र में नक्सलियों ने निशाना बनाया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत कई लोगों की मौत हुई थी। मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को NIA की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। NIA कोर्ट के फैसले से जहां मामले में दोषियों को न्यायिक रूप से जिम्मेदार ठहराए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस की ओर से यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि क्या झीरम हमले की पूरी साजिश और उसके पीछे के सभी पहलुओं की जांच हुई है ?
दीपक बैज की नार्को टेस्ट की मांग इसी बहस को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ले आई है। अब उनके इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। हालांकि, नार्को टेस्ट की मांग अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं करती। यह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की राजनीतिक मांग है। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दीपक बैज की इस मांग पर भाजपा और तत्कालीन सरकार में जिम्मेदारी संभाल चुके नेताओं की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या झीरम घाटी हमले की जांच को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर नए सिरे से तेज होती है।


