सीहोर 12 अक्टूबर 2026। सत्ता के नशे में कैसे अपनों को ही नजर अंदाज की जाती है और कैसे गरीबों के मकान और खेतों को जमींदोज किया जाता है, इसकी बानगी मध्यप्रदेश के सीहोर में सामने आयी है। अनुशासन और जनहित का राग अलापने वाली बीजेपी की मोहन यादव सरकार ने पूर्व सीएम और प्रदेश में मामाजी के नाम से मशहूर शिवराज सिंह के निर्देश को कुचल दिया। और सीहोर के कोसमी गांव में रविवार दोपहर आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़ दिए। फसल कुचल दी गई। प्रशासन की इस कार्रवाई पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह काफी नाराज नजर आये और उन्होने यहां तक कह दिया कि ये अन्याय की अति है, इनको भगवान भी माफ नहीं करेगा।
गौरतलब है कि सीहोर के कोसमी गांव में रविवार दोपहर 2 बजे वन विकास निगम ने आदिवासी परिवारों के 12 मकान पर बुलडोजर चला दिये और फसल कुचल दी गई। घटना की जानकारी के बाद रविवार रात केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे, तो महिलाएं उनसे मिलकर बिलख-बिलख कर रोने लगीं। इस दौरान शिवराज सिंह चैहान ने धरना स्थल पर ही बैठकर पीड़ित परिवारों की तकलीफ सुनी। और उन्होने प्रशासन की इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए निंदा की।
मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह ने कहा कि…..मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतिहां हुई है। जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं छाती पीट-पीटकर रो रही हैं। इस घटना से व्यथित शिवराज सिंह चैहान मौके पर ही मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया और प्रभावित परिवारों के लिए नए घर बनवाने और स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने खाने का इंतजाम करने का निर्देश दिया है। शिवराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने मामला रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।
शिवराज की मनाही के बाद भी मकान और खेत पर क्यों चला बुलडोजर ?
गौरतलब है कि कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। बताया जा रहा है कि करीब एक साल पहले शिवराज ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात कर आदिवासियों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। उनकी शिकायत पर सीहोर के तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को हटाया भी गया था। बावजूद इसके शिवराज सिंह के निर्देशों को मोहन यादव सरकार के अफसरों ने दरकिनार कर रविवार को वन विकास निगम ने कार्रवाई की। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। वन विकास निगम की इस कार्रवाई को अब सीधे तौर पर शिवराज सिंह के निर्देशों को कुचलने से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व और मौजूदा मुख्यमंत्रियों के बीच तकरार को लेकर विपक्ष हमलावर बना हुआ है।
जीतू पटवारी बोले…. ये टकराव की कहानी है
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सूबे की मोहन यादव सरकार के साथ ही शिवराज सिंह चैहान पर हमला बोला। उन्होने कहा…. शिवराज सिंह चौहान के पहले से रोकने के निर्देश के बावजूद मोहन यादव सरकार ने कार्रवाई की। भाजपा के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच टकराव की कहानी है। गरीब आदिवासी इसकी कीमत नहीं चुकाएंगे। कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की लड़ाई जमीन पर लड़ेगी। मोहन सरकार को जवाब देना होगा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा…..मोहन और मामा की आपसी खींचतान में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं। आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं। भाजपा सरकार की आपसी खींचतान के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। आखिर आदिवासियों का कसूर क्या हैघ् सत्ता की आपसी खींचतान की सजा गरीब आदिवासी परिवार क्यों भुगतेंघ् मोहन यादव जी, आदिवासियों के खेत और घर उजाड़ने वाली इस कार्रवाई पर जवाब दीजिए। प्रभावित परिवारों को न्याय और सुरक्षा कब मिलेगी ?
खैर, मध्य प्रदेश के सीहोर में वन विकास निगम की कार्रवाई को लेकर पक्ष और विपक्ष के नेता मोहन यादव सरकार पर हमलावर हैं। आदिवासियों के घर उजाड़े गए और फसलें बर्बाद हुईं, तो केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान धरने पर बैठ गए।
ऐसे में सवाल बस इतना है कि व्यवस्था के लिए गरीब आदिवासी की झोपड़ी इतनी बड़ी ‘अतिक्रमणकारी’ क्यों है और व्यवस्था की जवाबदेही इतनी छोटी क्यों ? पहले गरीब का आशियाना उजाड़ दो, फिर उसके आंसू पोंछकर हमदर्दी दिखा दो…!


