रायपुर 5 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति का इंतजार कर रहे D.Ed अभ्यर्थियों का गुस्सा गुरुवार को राजधानी रायपुर में सड़कों पर दिखाई दिया। पिछले 321 दिनों से आंदोलन कर रहे 400 से ज्यादा अभ्यर्थी अपने परिवारों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले पहुंच गए। उनकी मांग थी कि सरकार नियुक्ति की तारीख घोषित करे और मंत्री उनसे मुलाकात करें। लेकिन अभ्यर्थियों को मंत्री से बातचीत का मौका नहीं मिला। इसके बजाय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बंगले से टांगकर बाहर निकालने के बाद बसों में भर दिया और तूता धरना स्थल पहुंचा दिया। अभ्यर्थी गुरुवार तड़के ही मंत्री के बंगले पहुंच गए थे।
गौरतलब है कि D.Ed अभ्यर्थी लंबे समय से राजधानी रायपुर में नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल या सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलने से नाराज अभ्यर्थी गुरुवार तड़के अपने परिवार के सदस्यों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री के बंगले पहुंच गए। यहां प्रदर्शनकारियों ने बंगले के बाहर धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर मंत्री से मुलाकात पर अड़ गए। उनका कहना था कि 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की तारीख घोषित होने तक वे वहां से नहीं हटेंगे। अभ्यर्थी मंत्री गजेंद्र यादव से सीधे बातचीत करना चाहते थे और मुलाकात हुए बिना वापस लौटने को तैयार नहीं थे। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू की। बंगले के भीतर धरने पर बैठे अभ्यर्थियों को पुलिसकर्मियों ने हाथ-पैर पकड़कर बाहर निकाला।
कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटते हुए बसों तक ले जाया गया। इसके बाद उन्हें बसों में बैठाकर तूता धरना स्थल भेज दिया गया। इस दौरान बंगले के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। D.Ed अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले 321 दिनों से 2,300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। लंबा इंतजार और सरकार की ओर से नियुक्ति की तारीख स्पष्ट नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में नाराजगी बढ़ रही है। अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच दीपावली का त्योहार भी करीब है। ऐसे में रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों के सामने एक बार फिर वही सवाल है—आखिर नियुक्ति कब होगी? जिन घरों में नौकरी मिलने की उम्मीद में दीप जलने का इंतजार है, वहां अब तक अनिश्चितता बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 321 दिनों से नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थी आखिर किससे अपनी बात कहें? क्या उनकी मांग सुनने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए मंत्री के पास कुछ समय नहीं था? अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे बातचीत के लिए पहुंचे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस के जरिए उन्हें बंगले से हटा दिया गया। अब सवाल सिर्फ 2,300 पदों पर नियुक्ति की तारीख का नहीं है, बल्कि यह भी है कि इतने लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को सरकार कब तक इंतजार कराएगी। रोजगार की मांग लेकर मंत्री के दरवाजे पहुंचे इन युवाओं को फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।


