रायपुर 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बघेल ने सड़क पर टोल से लेकर स्कूल, स्वास्थ्य, आवास और खनिज नीति तक कई मुद्दों पर सरकार की नीति और नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता नहीं है और सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अधिकारी राज बढ़ रहा है। आवास के आंकड़ों में कथित अंतर और खनिज कानून को लेकर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर भी उन्होंने जवाब मांगा है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को कई मुद्दों पर घेरा है। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में जनता के हित से ज्यादा निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सबसे पहले प्रदेश की सड़कों पर टोल वसूली के मुद्दे को उठाया। भूपेश बघेल ने सवाल किया कि अगर जिला और ब्लॉक स्तर की सड़कों पर भी टोल लिया जाएगा, तो आम आदमी इन सड़कों से कैसे आवागमन करेगा। उन्होंने इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि ‘हमर लैब’ जैसी मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने दवाइयों की सप्लाई में टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। भूपेश बघेल ने कोल रॉयल्टी के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और करीब 6 हजार करोड़ रुपये निजी उद्योगपतियों को वापस किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन तमाम मामलों से यह सवाल उठता है कि सरकार की प्राथमिकता आखिर जनता है या निजी हित ?
खनिज कानून पर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल
भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार के हालिया खनिज कानून संशोधन को लेकर भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 से राज्यों के राजस्व और अधिकारों पर असर पड़ सकता है। बघेल ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ को इस तरह के बदलाव से नुकसान हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि केरल और झारखंड के मुख्यमंत्रियों ने इस मुद्दे पर विरोध जताया है, लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री इस मामले में मौन हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ के 2024 के फैसले का हवाला देते हुए भी केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाया और मुख्यमंत्री से पूछा कि जब दूसरे राज्य अपने हितों के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो छत्तीसगढ़ के हितों को लेकर मुख्यमंत्री क्यों नहीं बोल रहे?
स्कूलों में नेटवर्क नहीं, कई जगह एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई
बघेल ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्कूलों में नेटवर्क की समस्या के कारण शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में परेशान हो रहे हैं। दूसरी तरफ प्रदेश के कई स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग में ट्रांसफर व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कभी 3, कभी 5 तो कभी 10 शिक्षकों की सूची जारी हो रही है। बघेल ने कहा कि सरकार रिपोर्ट कार्ड बनाने से पहले शिक्षकों की कमी, नेटवर्क की समस्या और ट्रांसफर व्यवस्था को दुरुस्त करे।
‘भ्रष्टाचार और अधिकारी राज हद से ज्यादा बढ़ा’
पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार और अधिकारी राज बढ़ने का आरोप भी लगाया। धमतरी के वन मंडल कार्यालय के भवन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकार्पण के महज आठ महीने बाद ही भवन में दरारें आने लगी हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि वन मंडल अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और न तो कलेक्टर की सुनते हैं और न ही उच्च अधिकारियों की। उन्होंने सवाल किया कि अगर अधिकारी मनमानी करें और सरकारी भवन आठ महीने में ही दरकने लगे, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
PM आवास के आंकड़ों पर भी सरकार से मांगा जवाब
बारिश और गरीब परिवारों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार 18 लाख आवास बनाने का दावा कर रही है, जबकि सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पत्र के जवाब में करीब 10 लाख आवास की जानकारी सामने आई है। बघेल ने इन दोनों आंकड़ों को अलग-अलग बताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका सवाल है कि जब सरकारी आंकड़ों में ही अंतर है, तो ‘डबल इंजन’ की सरकार को जनता के सामने सही स्थिति बतानी चाहिए।
भूपेश बघेल ने इन तमाम मुद्दों को जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से टोल वसूली, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भ्रष्टाचार, खनिज कानून और अधिकारियों की कथित मनमानी जैसे मुद्दों पर जवाब देने की मांग की। हालांकि, बघेल द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सियासी टकराव और तेज होने की संभावना है।


