रायपुर 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में अवैध खनन का मुद्दा एक बार फिर सियासी केंद्र में आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सुकमा जिले के तुमलपाड़ क्षेत्र में कथित अवैध खनन का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए राज्य की विष्णुदेव साय सरकार पर तीखा हमला बोला है। बैज ने आरोप लगाया कि क्रेशर प्लांट की आड़ में अवैध उत्खनन किया जा रहा है और यह सब प्रशासनिक संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता।
डबल इंजन नहीं… डबल लूट!
एक इंजन सत्ता चला रहा है,दूसरा बस्तर के जल, जंगल और ज़मीन पर बुलडोज़र।👇
प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री जी बताइए—बस्तर के जंगल किसके हवाले हैं..?
खनिज किसके लिए निकाले जा रहे हैं..?और आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध उत्खनन बेखौफ जारी है..? pic.twitter.com/DgvUmQoCnt
— Deepak Baij (@DeepakBaijINC) August 4, 2026
दीपक बैज ने अपने पोस्ट में लिखा….“डबल इंजन नहीं… डबल लूट! एक इंजन सत्ता चला रहा है,दूसरा बस्तर के जल, जंगल और ज़मीन पर बुलडोज़र। प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री जी बताइए—बस्तर के जंगल किसके हवाले हैं..? खनिज किसके लिए निकाले जा रहे हैं..?और आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध उत्खनन बेखौफ जारी है..? वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भी इसी वीडियों का अपने एक्स हैंडल पर अपलोड कर सूबे की साय सरकार पर सवाल खड़े किये है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा…“बस्तर बिक रहा है… सरकार चुप है !
बस्तर बिक रहा है… सरकार चुप है!
सुकमा के तुमलपाड़ में क्रेशर प्लांट के नाम पर आखिर किसके संरक्षण में अवैध उत्खनन चल रहा है..?
ग्राम सभा की अनुमति नहीं…
वन विभाग की अनुमति नहीं…वनवासी मुख्यमंत्री जी जवाब दें— बस्तर के जल, जंगल, ज़मीन और खनिज आखिर किसे सौंपे जा रहे हैं..? pic.twitter.com/oWpaMAPiHs
— INC Chhattisgarh (@INCChhattisgarh) August 4, 2026
सुकमा के तुमलपाड़ में क्रेशर प्लांट के नाम पर आखिर किसके संरक्षण में अवैध उत्खनन चल रहा है..? ग्राम सभा की अनुमति नहीं… वन विभाग की अनुमति नहीं… वनवासी मुख्यमंत्री जी जवाब दें— बस्तर के जल, जंगल, ज़मीन और खनिज आखिर किसे सौंपे जा रहे हैं..? कांग्रेस का आरोप है कि सुकमा के तुमलपाड़ में क्रेशर प्लांट के नाम पर नियमों की अनदेखी करते हुए खनन किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यदि ग्राम सभा की स्वीकृति और वन विभाग की अनुमति के बिना खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो यह वन अधिकारों और पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ समय से अलग-अलग जिलों में अवैध खनन के मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि रेत, पत्थर, मुरूम और अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन में खनन माफिया सक्रिय हैं और कई स्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रही। कांग्रेस का दावा है कि खनन माफिया के बढ़ते प्रभाव से पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी क्षेत्रों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि इस मामले में राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सुकमा के तुमलपाड़ में कथित अवैध खनन को लेकर उठे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध खनन और खनिज संसाधनों के संरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।


