नई दिल्ली। हर साल मानसून के साथ देशभर में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने जापान की फार्मा कंपनी टाकेडा (Takeda) की डेंगू वैक्सीन QDENGA (TAK-003) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारत को अपनी पहली अधिकृत डेंगू वैक्सीन मिल गई है। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां हर साल डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, QDENGA एक लाइव-एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4—से सुरक्षा देने के लिए विकसित किया गया है। फरीदाबाद की रिहैबिलिटेशन केयर एक्सपर्ट डॉ. चारू दत्त के मुताबिक, इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होती कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ था या नहीं। यही कारण है कि बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने में यह वैक्सीन काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
पुरानी वैक्सीन से क्यों अलग है QDENGA ?
पहले उपलब्ध डेंगू वैक्सीन Dengvaxia के इस्तेमाल से पहले मरीज की पूर्व संक्रमण की स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट आवश्यक होता था। लेकिन QDENGA इस बाध्यता को समाप्त करती है, जिससे इसका उपयोग अधिक व्यापक और आसान हो जाता है। यही वजह है कि इसे वैश्विक स्तर पर डेंगू नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारत से पहले यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना सहित 40 से अधिक देशों में इस वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है। अब भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो डेंगू की रोकथाम के लिए आधुनिक टीकाकरण रणनीति अपना रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले ?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, मच्छरों के नए प्रजनन स्थल, अनियोजित निर्माण और बढ़ती आबादी के कारण डेंगू का खतरा लगातार बढ़ा है। बारिश के मौसम में घरों और आसपास जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल वातावरण बनाता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है।
किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा ?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैक्सीन खासतौर पर उन इलाकों के लोगों के लिए लाभदायक हो सकती है जहां हर साल डेंगू का प्रकोप रहता है। हालांकि, किस आयु वर्ग को यह वैक्सीन दी जाएगी, इसकी विस्तृत गाइडलाइन और राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में इसे शामिल करने का फैसला सरकार द्वारा अलग से जारी किया जाएगा। हालांकि वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसके बाजार में उपलब्ध होने, कीमत और राष्ट्रीय स्तर पर रोलआउट को लेकर विस्तृत योजना जल्द जारी होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह वैक्सीन व्यापक स्तर पर उपलब्ध होती है तो डेंगू से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
डेंगू से बचाव के लिए वैक्सीन के साथ सावधानी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन एक मजबूत सुरक्षा कवच जरूर है, लेकिन डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों की रोकथाम, घर के आसपास पानी जमा न होने देना, पूरी बाजू के कपड़े पहनना और मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करना अब भी उतना ही जरूरी रहेगा। भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मिली मंजूरी सिर्फ एक नई दवा नहीं, बल्कि हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली इस गंभीर बीमारी के खिलाफ देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक नई उम्मीद मानी जा रही है।

