बिलासपुर 4 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन की ओर से जवाब और जांच रिपोर्ट पेश करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच ने शासन को आखिरी मौका देते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब और अब तक की कार्रवाई की जानकारी शपथपत्र के साथ पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समय में जवाब पेश नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
जानकारी के मुताबिक मामले में 12 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य शासन को शिकायत पर की गई कार्रवाई और जांच से जुड़ी आवश्यक जानकारी पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन अगली कार्रवाई तक शासन की ओर से अपेक्षित जवाब और जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश नहीं की जा सकी। शासन की ओर से हुई इस देरी और उदासीनता को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और अब एक सप्ताह की समय सीमा तय की है। अदालत ने लिखित जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।
क्या है पूरा मामला
आपको बता दे ये पूरा मामला कोरबा की एक महिला योग टीचर की शिकायत से जुड़ा है। महिला ने IPS रतनलाल डांगी पर ऑनलाइन योग क्लास के दौरान कथित तौर पर अश्लील बातचीत करने और वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हरकत करने के आरोप लगाए हैं।महिला का आरोप है कि जब उसने उनकी बात नहीं मानी, तो उसे और उसके सब इंस्पेक्टर पति को कथित तौर पर धमकाया गया। महिला के मुताबिक, उसके पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ट्रांसफर करने की धमकी भी दी गई। पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को कथित सबूतों के साथ तत्कालीन DGP से शिकायत की थी। इसके बाद मार्च 2026 में रतनलाल डांगी को निलंबित कर दिया गया। शिकायत की जांच के लिए DGP की ओर से तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी बनाया गया था।
जांच अधिकारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नियुक्त किए गए जांच अधिकारियों में एक अधिकारी आरोपी के समान रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे जूनियर थीं। इसी आधार पर याचिका में दोनों अधिकारियों को जांच से हटाकर किसी वरिष्ठ IPS अधिकारी से जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से किसी वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी से जांच कराने का आग्रह किया है। अब हाईकोर्ट ने शासन को एक सप्ताह के भीतर जवाब और जांच से जुड़ी जानकारी पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। फिलहाल अदालत के निर्देश के बाद इस मामले में राज्य शासन की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब और जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी।


