HeaLTH tIPS: कैंसर दुनिया की गंभीर बीमारियों में शामिल है। इससे बचाव के लिए खान-पान और लाइफस्टाइल को बेहतर रखने की सलाह दी जाती है। इसी बीच मशरूम को लेकर एक रिसर्च सामने आई है, जिसमें इसके सेवन और कैंसर के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। अमेरिका की Pennsylvania State University के शोधकर्ताओं ने मशरूम के सेवन और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध को समझने के लिए 17 अध्ययनों की systematic review और meta-analysis की। इन अध्ययनों में 19,500 से अधिक लोगों का डेटा शामिल था। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादा मशरूम खाने वाले लोगों में कुल कैंसर का जोखिम कम पाया गया।
18 ग्राम मशरूम से कितना कम था जोखिम ?
अध्ययन के dose-response analysis के मुताबिक, रोजाना करीब 18 ग्राम मशरूम खाने वालों में मशरूम न खाने वालों की तुलना में कुल कैंसर का जोखिम लगभग 45% कम पाया गया। यह एक association थी, यानी अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि मशरूम खाने से सीधे तौर पर कैंसर को रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि मशरूम के सेवन और breast cancer के कम जोखिम के बीच संबंध विशेष रूप से देखा गया। हालांकि दूसरे विशिष्ट कैंसरों के लिए उपलब्ध अध्ययनों की संख्या सीमित थी।
मशरूम में मौजूद है खास एंटीऑक्सीडेंट
शोधकर्ताओं के मुताबिक मशरूम ergothioneine नामक एंटीऑक्सीडेंट का प्रमुख dietary source है। यह एक ऐसा यौगिक है जिसे antioxidant और cellular protector के रूप में अध्ययन किया गया है। मशरूम में ergothioneine और glutathione जैसे antioxidant compounds भी पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि oxidative stress और cellular damage को प्रभावित करने वाले ये यौगिक मशरूम और कैंसर के कम जोखिम के बीच देखे गए संबंध में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इसके पीछे के mechanisms को समझने के लिए आगे और research की जरूरत बताई गई है।
क्या मशरूम कैंसर से बचा सकता है ?
इस रिसर्च को पढ़ते समय एक बात समझना जरूरी है। अध्ययन में मशरूम खाने और कैंसर के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मशरूम कैंसर की रोकथाम या इलाज की गारंटी देता है। अध्ययन में शामिल कई शोध observational थे और शोधकर्ताओं ने स्वयं recall तथा selection bias जैसी सीमाओं का उल्लेख किया था। इसलिए मशरूम को संतुलित और विविध आहार का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे कैंसर की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।


