Health Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, कब्ज, गैस, अपच और शारीरिक निष्क्रियता जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करना शरीर और मन को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है। कपालभाति भी ऐसी ही एक योग क्रिया है, जिसमें सांस को तेजी से बाहर छोड़ा जाता है और सांस अंदर की ओर सामान्य रूप से आती है।
कपालभाति योग की एक श्वसन क्रिया है। इसे करते समय पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करते हुए तेजी से सांस बाहर छोड़ी जाती है, जबकि सांस अंदर अपने आप आती है। इसे आमतौर पर खाली पेट और आरामदायक मुद्रा में करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कपालभाति को केवल कुछ मिनट करने से सभी बीमारियां ठीक हो जाएंगी, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से नहीं किया जा सकता। इसे स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय उपचार के पूरक अभ्यास के तौर पर देखना बेहतर है।
पाचन तंत्र के लिए हो सकता है मददगार
कपालभाति के दौरान पेट की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है। नियमित योग अभ्यास के साथ यह कुछ लोगों में पाचन से जुड़ी परेशानी, पेट की जकड़न और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कब्ज, गैस या एसिडिटी से परेशान लोगों को हालांकि केवल प्राणायाम पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है।
तनाव और बेचैनी में मिल सकती है राहत
योग और नियंत्रित श्वसन अभ्यास मानसिक तनाव कम करने और मन को शांत करने में मदद कर सकते हैं। कपालभाति के दौरान सांस पर ध्यान केंद्रित करने से एकाग्रता और मानसिक सजगता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि कपालभाति सीधे तौर पर याददाश्त बढ़ाता है या शरीर से सभी ‘टॉक्सिन’ बाहर निकाल देता है। शरीर में अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम मुख्य रूप से लिवर और किडनी जैसे अंग करते हैं।
क्या इम्यूनिटी और संक्रमण से बचाव करता है ?
नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली शरीर की समग्र सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन कपालभाति को वायरल संक्रमण, फ्लू या सर्दी-जुकाम से बचाने वाला उपचार नहीं माना जाना चाहिए। संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता, पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और आवश्यक टीकाकरण ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
कपालभाति करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- इसे शुरुआत में कम समय और धीमी गति से करें।
- खाली पेट अभ्यास करना बेहतर माना जाता है।
- सांस रोकने या जरूरत से ज्यादा जोर लगाने से बचें।
- चक्कर, सांस फूलना, सीने में दर्द या असहजता महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक दें।
- गर्भावस्था, हालिया सर्जरी, गंभीर हृदय या फेफड़ों की बीमारी, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले लोग इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लें।
कपालभाति को रोजमर्रा की योग दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे हर बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है। सही तकनीक, संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम के साथ योग का अभ्यास ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित हो सकता है।


