Health Tip : बारिश और उमस के मौसम में घर के अंदर कपड़े सुखाना ज्यादातर लोगों की मजबूरी बन जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है? विशेषज्ञों के मुताबिक, बंद कमरे में गीले कपड़े सुखाने से घर के अंदर नमी तेजी से बढ़ती है, जिससे फफूंदी पनपने लगती है। यही फफूंदी सांस संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गीले कपड़े घर के अंदर सूखने के दौरान हवा में करीब दो लीटर तक नमी छोड़ते हैं। यदि कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं है, तो नमी का स्तर लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
यही वातावरण दीवारों, छत और कपड़ों पर फफूंदी बनने के लिए अनुकूल माना जाता है। सबसे खतरनाक फफूंदी एस्परगिलस फ्यूमिगेटस मानी जाती है। इसके सूक्ष्म बीजाणु सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर अधिक होता है जिन्हें पहले से अस्थमा, COPD, सिस्टिक फाइब्रोसिस या फेफड़ों की अन्य पुरानी बीमारी है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में यह गंभीर फंगल संक्रमण का कारण भी बन सकती है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
- अस्थमा के मरीज
- COPD और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग
- बुजुर्ग
- छोटे बच्चे
- कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक फफूंदी के संपर्क में रहने से सांस फूलना, लगातार खांसी, एलर्जी, सीने में जकड़न और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
घर में कपड़े सुखाने हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
यदि बाहर कपड़े सुखाने की सुविधा नहीं है, तो इन उपायों को अपनाएं—
- कमरे की खिड़कियां और दरवाजे खुले रखें, ताकि हवा का प्रवाह बना रहे।
- एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
- कपड़ों को हवादार कमरे में ही सुखाएं।
- एक कमरे में बहुत अधिक गीले कपड़े एक साथ न फैलाएं।
- दीवारों या छत पर सीलन और फफूंदी दिखाई दे तो तुरंत साफ करें।
क्या है सबसे सुरक्षित तरीका ?
विशेषज्ञों की सलाह है कि जहां तक संभव हो, कपड़ों को खुले वातावरण या धूप में सुखाना सबसे सुरक्षित विकल्प है। इससे नमी घर के अंदर जमा नहीं होती और फफूंदी पनपने का खतरा काफी कम हो जाता है। बारिश के मौसम में घर के अंदर कपड़े सुखाना भले ही आसान समाधान लगे, लेकिन लगातार ऐसा करना आपके घर की हवा की गुणवत्ता और फेफड़ों की सेहत पर असर डाल सकता है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल फफूंदी से बचा जा सकता है, बल्कि पूरे परिवार को सांस संबंधी बीमारियों के खतरे से भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

