CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पांचवें दिन भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की झड़ी लगा दी। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में लगभग एक साथ गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जीतकर खिलाड़ियों ने न सिर्फ भारत की झोली पदकों से भर दी, बल्कि कई ऐतिहासिक उपलब्धियां भी अपने नाम कीं। सोमवार को भारत ने कुल छह पदक जीते, जिसके बाद देश के खाते में अब 2 स्वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्य सहित कुल 10 पदक हो गए हैं। भारत फिलहाल पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलेटिक्स की महिलाओं की F57 शॉट पुट स्पर्धा में मिली, जहां हरियाणा की 40 वर्षीय शर्मिला धनखड़ ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने कांस्य पदक हासिल कर भारत की सफलता को और मजबूत किया।
गार्ड से लेकर खेतों तक किया काम… अब देश को दिलाया गोल्ड
शर्मिला धनखड़ की कहानी सिर्फ एक स्वर्ण पदक की नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और जज्बे की मिसाल है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली शर्मिला महज दो साल की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थीं, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित। आर्थिक हालात इतने कमजोर थे कि बेहतर इलाज भी संभव नहीं हो पाया। जीवन की चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं। कम उम्र में शादी हुई, लेकिन वैवाहिक जीवन में घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। पति की प्रताड़ना के बाद उन्हें घर छोड़ना पड़ा और आखिरकार तलाक हो गया।
परिवार चलाने के लिए उन्होंने सिक्योरिटी गार्ड, क्लीनर, आया और खेतों में मजदूरी तक की, लेकिन हालात के आगे हार नहीं मानी।34 वर्ष की उम्र में उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा। कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग जारी रखने के लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। पूरा परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। आज उसी संघर्ष ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक तक पहुंचा दिया।
भारत के लिए रहा शानदार दिन
भारत के लिए सोमवार कई और खुशियां लेकर आया। हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स की हाई जंप स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। वेटलिफ्टिंग के 79 किलोग्राम वर्ग में अजय बाबू ने रजत पदक जीता, जबकि 58 किलोग्राम वर्ग में बिंदियारानी देवी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। 53 किलोग्राम वर्ग में छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी यादव ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। इन सफलताओं के साथ भारत का अभियान लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है। खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से पदक तालिका में भारत की स्थिति सुधरी है और आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।

