बलरामपुर 7 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक सरकारी स्कूल में दो छात्रों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। वाड्रफनगर स्थित प्रेमनगर डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के दो छात्रों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मामूली गलती पर खेल प्रभारी शिक्षक ने बच्चों को कमरे में बंद कर स्टम्प से बेरहमी से पीटा। इस घटना में दोनों छात्रों की पीठ पर गंभीर चोट के निशान पड़ गए। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जवाबदेही, विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक ये पूरा घटनाक्रम वाड्रफनगर स्थित प्रेमनगर डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल का है। परिजनों के मुताबिक स्कूल स्कूल में हुए पिटाई की घटना के बाद से बच्चे काफी डरे और सहमे हुए थे। शुरुआत में उन्होंने घटना के बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन बार-बार पूछने पर पूरी घटना बताई। बच्चों का आरोप है कि पिटाई के बाद उन्हें यह कहकर धमकाया गया कि अगर उन्होंने घर जाकर किसी को इस बारे में बताया, तो उन्हें किसी गंभीर मामले में फंसा दिया जाएगा। घटना के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि बच्चों से कोई गलती हुई थी, तो इसकी जानकारी अभिभावकों को दी जानी चाहिए थी।
बच्चों को कमरे में बंद कर शारीरिक दंड देना न केवल अमानवीय है, बल्कि बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। परिजनों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इधर स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित खेल प्रभारी गंगाधर को उनके पद से हटा दिया है। स्कूल के प्राचार्य अंशु यादव ने बताया कि शिकायत सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक वातावरण देना है, लेकिन यदि अनुशासन के नाम पर शारीरिक दंड और डर का माहौल बनाया जाता है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है। अब इस मामले में नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग की जांच पर है। यह देखना होगा कि कार्रवाई केवल प्रारंभिक स्तर तक सीमित रहती है या फिर जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कदम भी उठाए जाते हैं।


