रायपुर 20 जून 2026। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत के अवैध कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई में बीजेपी नेता समेत तीन लोगों की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गयी। अभी ये मामला शांत भी नहीं हुआ है, उधर इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद भी रेत माफियाओं के हौसले पस्त होते नजर नहीं आ रहे हैं। एक ओर अवैध रेत कारोबार खूनी संघर्ष की वजह बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्रों में रेत का अवैध उत्खनन और भंडारण खुलेआम जारी है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 10 जून से रेत घाट आगामी 4 माह के लिए बंद कर दिये गये है। लेकिन रेत माफियाओं के लिए यहीं चार महीने अंधाधुन कमाई का वक्त बताया जाता है। लिहाजा कोरिया जिले में रेत के अवैध खनन और वसूली को लेकर हुए हत्याकांड के बाद भी सूबे के कई इलाकों में आज भी रेत का अवैध खनन और परिवहन का काम धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला जशपुर जिला के छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा से लगे लोदाम थाना क्षेत्र के ग्राम पुत्रीचौरा का है।
जहां शंख नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से रेत निकालकर उसका भंडारण किए जाने का आरोप स्थानीय ग्रामीण लगा रहे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे और गौठान की जमीन तक रेत माफियाओं द्वारा अवैध रूप से रेत का भंडारण किया जा रहा है।
आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण रेत माफिया बेखौफ होकर सरकारी जमीनों और नदी से प्रतिबंध के बाद भी अवैध रेत का खनन कर रहे है। इस अवैध कारोबार के साथ ही रेत परिवहन में लगे वाहनों से अवैैध वसूली का नेटवर्क भी संचालित हो रहा है। स्थानीय ट्रैक्टर चालकों से प्रति ट्रिप 100 रुपये वसूले जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि इस वसूली से हर महीने लाखों रूपये की अवैध कमाई की जा रही है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध उत्खनन, भंडारण और कथित वसूली की जानकारी प्रशासन को होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही वजह है कि रेत माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक अवैध खनन और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक शासन को राजस्व नुकसान और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बनी रहेंगी।
3 हत्या के बाद भी माफियाराज हावी
आपको बता दे पिछले दिनों कोरिया जिले में रेत कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई में भाजपा नेता सहित तीन लोगों को जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। उम्मीद थी कि इसके बाद सरकार और प्रशासन अवैध खनन पर सख्ती करेगा, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। पुत्रीचौरा में जारी अवैध उत्खनन और भंडारण यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी वारदात के बाद भी रेत माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
पंचायत ने भी उठाए सवाल
ग्राम पंचायत पुत्रीचौरा के सरपंच अरुण लकड़ा ने स्वीकार किया है कि शंख नदी में वर्षों से अवैध रेत उत्खनन और भंडारण हो रहा है। उन्होंने बताया कि पंचायत ने वैधानिक रूप से रेत खदान संचालन का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था, लेकिन नई नीतियों और प्रक्रियाओं के कारण मामला लंबित है।पंचायत सचिव रामचंद्र राम ने भी माना कि अवैध खनन के कारण शासन और पंचायत दोनों को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि नियमों के तहत खदान संचालन की अनुमति मिलती तो सरकार और पंचायत दोनों को आर्थिक लाभ होता।


