कोरबा 29 जुलाई 2026। कोरबा जिले के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्बन फैक्ट्री में शनिवार को हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के बाद अब औद्योगिक सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हादसे के अगले ही दिन फैक्ट्री में सफाई के लिए बुलाए गए मजदूरों को कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए। सफाई के दौरान एक मजदूर की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है, जबकि कुछ अन्य मजदूरों के भी प्रभावित होने की चर्चा है।
जानकारी के मुताबिक शनिवार को फैक्ट्री में पिच अनलोडिंग के दौरान टंकी में लिकेज होने के कारण कोल टार पीच में आग लग गयी और जोरदार ब्लास्ट हो गया था। हाई टेम्परेचर के कारण उबलता हुआ कच्चा मटेरियल बाहर निकल आया और कुछ ही देर में फैक्ट्री परिसर में आग फैल गई। आग और धुएं का असर इतना ज्यादा था कि धुएं का गुबार करीब दो किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। हादसे के वक्त फैक्ट्री में मौजूद मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई।
आग बुझाने के लिए नगर सेना, बालको, सीएसईबी और अन्य औद्योगिक इकाइयों की दमकल टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान फैक्ट्री में बोरियों में रखा कच्चा माल और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे थे। हादसे के अगले दिन रविवार को नियमित मजदूर फैक्ट्री नहीं पहुंचे। इसके बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने रेलवे फाटक क्षेत्र से करीब 10 से 11 मजदूरों को बुलाकर सफाई का काम शुरू कराया।
आरोप है कि उस समय फैक्ट्री के भीतर मौजूद राख और जले हुए अवशेष पूरी तरह ठंडे नहीं हुए थे। इसके बावजूद मजदूरों को मास्क, दस्ताने या अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए बिना सफाई कार्य में लगाया गया। सफाई के दौरान कथरीमाल निवासी मजदूर शिवशंकर साहू की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के मुताबिक, काम के दौरान उसे गले में खराश महसूस हुई। घर पहुंचने के बाद उसकी हालत और खराब हो गई और गले में तेज दर्द शुरू हो गया।
रात करीब साढ़े 8 बजे उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद देर रात उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी देने के बावजूद उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया। वहीं, सूत्रों के अनुसार सफाई कार्य में शामिल कुछ अन्य मजदूर भी अस्वस्थ हुए हैं और उनका निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए बिना सफाई शुरू कराई गई ? क्या मजदूरों को जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे ? और हादसे के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की जांच की गई या नहीं ? फिलहाल, बॉयलर ब्लास्ट के कारणों और सफाई के दौरान मजदूरों की तबीयत बिगड़ने के मामले में फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।

