अंबिकापुर 19 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले के बतौली में स्वामी आत्मानंद स्कूल परिसर में पेड़ों की कटाई और लकड़ी की बिक्री से जुड़ी कथित अनियमितता के मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने स्कूल की प्रिंसिपल प्रसन्ना केरकेट्टा को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विभागीय जांच में अनुमति से अधिक पेड़ काटे जाने और लकड़ी की राशि शासन के खाते में जमा करने में अनियमितता सामने आने के बाद की गई है।
जानकारी के मुताबिक बतौली के स्वामी आत्मानंद स्कूल परिसर में बालक छात्रावास बनाने के लिए प्रिंसिपल ने सीतापुर SDM से 26 पेड़ काटने की अनुमति ली थी। शिकायत के बाद हुई जांच में स्कूल परिसर में कुल 49 पेड़ काटे जाने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान मौके पर पेड़ों के ठूंठ भी मिले। जांच रिपोर्ट के अनुसार काटे गए पेड़ों में 21 नीलगिरी, 3 अरकेशिया, 2 बकेन और 23 शीशम के पेड़ शामिल हैं। जांच में पेड़ों की कटाई के साथ लकड़ी की बिक्री और उससे प्राप्त राशि को लेकर भी सवाल सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंसिपल ने काटी गई लकड़ी को बेचने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षक दिनेश सिंह को दी थी। शिक्षक ने लकड़ी बेचकर 4 लाख 9 हजार रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी।
वहीं, जांच में लकड़ी की अनुमानित कीमत 10 लाख रुपये से अधिक बताई गई। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, इसमें से 2 लाख 29 हजार 881 रुपये 19 जनवरी 2026 को शासन के खाते में जमा किए गए थे। यही अंतर जांच का अहम बिंदु बना। मामले की शिकायत मिलने के बाद सरगुजा के जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार झा ने जांच के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर बतौली BEO शरत चंद्र मेसपाल ने मामले की जांच की। जांच के बाद BEO ने पेड़ों की कटाई और लकड़ी की राशि से जुड़े मामले में वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच कराने की सिफारिश की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर DEO ने प्रिंसिपल प्रसन्ना केरकेट्टा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
जवाब मिलने के बाद मामला आगे की कार्रवाई के लिए स्कूल शिक्षा विभाग रायपुर भेजा गया। मामले में अब स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने प्रिंसिपल प्रसन्ना केरकेट्टा के निलंबन का आदेश जारी किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक कार्यालय, अंबिकापुर रहेगा। इस मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ पेड़ों की कटाई, लकड़ी की बिक्री और शासन के खाते में जमा राशि से जुड़े तथ्यों की जांच आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 26 पेड़ काटने की अनुमति के बावजूद 49 पेड़ कैसे काटे गए और लकड़ी की पूरी राशि शासन के खाते में क्यों जमा नहीं हुई ? शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब आगे की जांच में इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है.


