रायपुर, 6 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले को लेकर राजनीतिक और कानूनी सरगर्मी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हैं और उन्हें गलत तरीके से जेल में बंद करके रखा गया है।
भूपेश बघेल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और कांग्रेस नेताओं की भूमिका को लेकर प्रदेश की राजनीति में लगातार सवाल-जवाब हो रहे हैं। दूसरी तरफ बचाव पक्ष जांच एजेंसी की कार्रवाई को राजनीतिक बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। रामगोपाल अग्रवाल को 5 नवंबर को बिलासपुर हाईकोर्ट से शराब घोटाले से जुड़े एक ACB मामले में जमानत मिली है। हालांकि, इस राहत के बावजूद उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी है।
इसकी वजह उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामले हैं, जिनमें अभी जमानत मिलना बाकी है। कोयला और चावल घोटाले से जुड़े मामलों में भी उनकी कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण है। बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल को ऐसे बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है, जिसमें उनका नाम किसी FIR में नहीं था। वकील ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए कहा है कि कांग्रेस में महत्वपूर्ण पद पर रहने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। ये बचाव पक्ष के आरोप हैं, जिन पर अदालत में सुनवाई होनी है।
ED का दावा- राजीव भवन पहुंचाए गए 860 से 880 करोड़ रुपये
शराब घोटाले की जांच में ED ने दावा किया है कि कथित शराब सिंडिकेट से जुटाई गई करीब 860 से 880 करोड़ रुपये की रकम रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाई गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस रकम को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाने में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका थी और यह पूरी प्रक्रिया उनकी निगरानी में हुई। ED ने इस मामले में उनकी दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इनकी कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी ने 8 अक्टूबर को संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया था।
इसके अगले दिन 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई। इस पूरे मामले में कांग्रेस और जांच एजेंसियों के दावे अलग-अलग हैं। ED का आरोप है कि शराब सिंडिकेट से अवैध कमाई की गई और उसका एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक गतिविधियों तथा कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाया गया। वहीं, बचाव पक्ष इन आरोपों को चुनौती दे रहा है और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रहा है। भूपेश बघेल की जेल में मुलाकात और उनके बयान से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। अब इस मामले में अदालत की आगामी सुनवाई और जांच एजेंसियों की ओर से पेश किए जाने वाले साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।


