कोरबा 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खानपान और जनजातीय विरासत को करीब से जानने का अवसर अब कोरबा के कटघोरा स्थिति गढ़कलेवा में मिल रहा है। यहां छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के साथ बस्तर के प्राकृतिक खाद्य उत्पाद, पारंपरिक परिधान और आभूषण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल से गढ़कलेवा खानपान के केंद्र के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को जानने का एक मंच बनकर उभर रहा है।
गढ़कलेवा में बस्तर के पारंपरिक और प्राकृतिक खाद्य उत्पाद लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इनमें महुआ के लड्डू, महुआ कुकीज़ और महुआ ग्रीन टी प्रमुख हैं। इन उत्पादों के माध्यम से लोगों को बस्तर के पारंपरिक स्वाद से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। पारंपरिक खानपान के साथ यहां छत्तीसगढ़ की लोकवेशभूषा और आभूषणों की भी श्रृंखला उपलब्ध है। गमछा, साड़ी और पारंपरिक आभूषणों के जरिए ग्राहक प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी वस्तुएं खरीद सकते हैं।
स्व सहायता समूह कर रहा संचालन
गढ़कलेवा का संचालन श्रीया स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। समूह की अध्यक्ष नीलम सोनी ने बताया कि बस्तर के खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और प्राकृतिक विशेषताएं उन्हें अलग पहचान देती हैं। इन उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का उद्देश्य पारंपरिक खाद्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय विरासत से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक परिधान और आभूषण भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। खानपान के साथ सांस्कृतिक वस्तुओं की उपलब्धता से लोगों को छत्तीसगढ़ की विविध परंपराओं को एक ही स्थान पर देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।
कटघोरा का गढ़कलेवा अब पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ बस्तर के प्राकृतिक खाद्य उत्पादों और प्रदेश की लोकवेशभूषा को भी एक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। ऐसी पहल स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, स्व सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मददगार हो सकती है। गढ़कलेवा के माध्यम से लोगों को प्रदेश के पारंपरिक स्वाद और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने और उन्हें व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


