जांजगीर 9 सितंबर 2026। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा में करीब दो महीने से पुलिस के लिए पहेली बना अमित भंडारी हत्याकांड आखिरकार सुलझ गया है। पुलिस के मुताबिक हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग वजह बना। मामले में भाई-बहन समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि हत्या के बाद आरोपियों ने शव को करीब 24 घंटे से ज्यादा समय तक घर के पीछे झाड़ियों में छिपाकर रखा और बाद में पुलिस को गुमराह करने के लिए शव को गांव के बीचो-बीच दूसरी जगह पर रख दिया। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल छोटा फावड़ा/रापा और शव को स्थानांतरित करने में इस्तेमाल की गई सीढ़ी भी बरामद की है। इस केस की जांच में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों का इस्तेमाल किया।
जानकारी के मुताबिक हत्या की ये वारदात मुलमुला थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने जांच में खुलासा किया कि 27 जून 2026 की रात अमित भंडारी अपने घर से निकला था। इसके बाद उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और पुलिस को भी सूचना दी। 29 जून की सुबह अमित का शव गांव के अमहदा तालाब के पास स्थित एक निर्जन बाड़ी में मिला। गांव के बीच हुए इस हत्याकांड से इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में जांच के दायरे में प्रेम प्रसंग के अलावा गांव में चलने वाले जुआ-सट्टे और शराब से जुड़े असामाजिक तत्वों तथा पुराने ग्राम पंचायत चुनाव के विवाद को भी रखा गया।
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, अमित भंडारी का गांव की ही संतोषी सिंह से शादी से पहले से प्रेम संबंध था। पुलिस का दावा है कि शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही। अमित जब बाहर काम करने जाता था और गांव लौटता था, तब दोनों के बीच मुलाकात और फोन पर बातचीत होती थी। पुलिस के अनुसार, घटना वाली रात भी अमित और संतोषी करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बात करते रहे। इसके बाद रात करीब 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा। पुलिस की जांच के मुताबिक, उसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा। घर के पीछे से आवाज आने पर वह वहां पहुंचा और उसने अपनी बहन के साथ अमित को देख लिया।
पुलिस का दावा है कि इसके बाद बजरंग और अमित के बीच विवाद हुआ और मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान अमित का सिर पीछे दीवार से टकराया, जिससे वहां खून के निशान बन गए। अमित कथित तौर पर जान बचाकर भागने के लिए दीवार फांदने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान बजरंग ने पास पड़े छोटे फावड़े/रापा से उसके सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद बजरंग घबरा गया। उसी रात गांव में चोरी की सूचना के कारण डायल 112 की टीम भी मौजूद थी और ग्रामीण जाग रहे थे। ऐसे में शव को तत्काल कहीं और ले जाना जोखिम भरा था। पुलिस का दावा है कि इसी वजह से बजरंग ने अमित के शव को घर के पीछे बाड़ी में ही झाड़ियों के नीचे छिपा दिया। इस पूरी घटना को उसकी बहन संतोषी ने देखा और शव छिपाने में मदद की।
अगले दिन भाई को बताया पूरा राज, फिर रचा गुमराह करने का प्लान
पुलिस के मुताबिक, 28 जून को बजरंग का बड़ा भाई पप्पू सिंह काम से वापस गांव लौटा। बजरंग ने उसे पूरी घटना बताई और मदद करने को कहा। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर पुलिस को गुमराह करने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, दोनों मृतक के परिजनों के साथ अमित को तलाशने का नाटक करते रहे और उनके साथ थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने में भी शामिल हुए। इसके बाद रात करीब 12 बजे दोनों ने मौका देखकर शव को बाड़ी से निकालकर गांव के बीचो-बीच दूसरी जगह रख दिया, ताकि हत्या का शक उन पर न जाए।
मामले की जांच के लिए जिला पुलिस कप्तान ने SIT का गठन किया। टीम ने आरोपियों और संदिग्धों के मोबाइल की CDR, IPDR, टावर डंप, GPS और CCTV फुटेज की जांच की। घटना के समय संदिग्धों की लोकेशन, उनके व्यवहार और घटना के बाद की गतिविधियों को भी खंगाला गया। पुलिस ने अलग-अलग बयानों में सामने आए विरोधाभासों को भी जांच का हिस्सा बनाया। इसी दौरान बिलासपुर से सीनियर ट्रैकर डॉग विमला को भी जांच में शामिल किया गया। पुलिस के मुताबिक, डॉग द्वारा दी गई लीड ने जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट से खुली परतें
जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्धों से पूछताछ के साथ ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं से जांच में मिले संदेह और अन्य साक्ष्यों को जोड़ने में मदद मिली। इसके बाद आरोपियों से दोबारा पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। हालांकि, किसी भी आरोपी का दोष न्यायालय में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
तीनों आरोपी गिरफ्तार, दो न्यायिक रिमांड पर
पुलिस ने मामले में बजरंग सिंह निवासी कोसा, संतोषी सिंह निवासी हाथनेवरा चांपा और पप्पू सिंह निवासी कोसा को गिरफ्तार किया है।पुलिस के मुताबिक, संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं बजरंग सिंह का पुलिस रिमांड लिया गया है, जिसके दौरान आगे फॉरेंसिक जांच की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल छोटा फावड़ा/रापा और शव को दूसरी जगह ले जाने में इस्तेमाल की गई छोटी सीढ़ी बरामद करने का दावा किया है।
दो महीने बाद खुला अंधे कत्ल का राज
गांव के बीच हुई इस हत्या ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए थे। शव मिलने के बाद पुलिस ने अलग-अलग एंगल से जांच शुरू की और करीब दो महीने तक तकनीकी साक्ष्यों, संदिग्धों की गतिविधियों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ती रही। अब पुलिस का दावा है कि प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ विवाद हत्या तक पहुंचा और हत्या के बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए शव को दूसरी जगह ठिकाने लगाया। इस पूरे मामले में आधुनिक तकनीकी जांच, ट्रैकर डॉग की लीड और पुलिस की SIT जांच को अहम माना जा रहा है। हालांकि आगे की कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय में पेश होने वाले साक्ष्यों के बाद ही मामले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।


