सुकमा 16 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से सुरक्षा बलों की संवेदनशीलता और इंसानियत की तस्वीर सामने आई है। स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा ड्यूटी पूरी कर लौट रहे DRG जवानों ने एक बीमार आदिवासी ग्रामीण को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए अपनी तरफ से हर संभव मदद की। भीमापुरम इलाके में जब मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला, तो जवानों ने उसे चारपाई समेत अपने कंधों पर उठाया और पैदल अस्पताल तक पहुंचाया। जवानों के इस प्रयास की अब हर तरफ सराहना हो रही है।
जानकारी के मुताबिक DRG गोल्फ टीम के जवान स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थे। ड्यूटी खत्म कर लौटते समय भीमापुरम इलाके में उनकी नजर एक परिवार पर पड़ी। परिवार के लोग एक बीमार ग्रामीण को चारपाई पर लेकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। मरीज की हालत को देखते हुए उसे तत्काल इलाज की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल तक पहुंचने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। ऐसे में जवानों ने परिवार की परेशानी को समझा और मदद के लिए आगे आए।
DRG जवानों ने मरीज को चारपाई समेत अपने कंधों पर उठाया और पैदल ही आगे बढ़ गए। जवानों ने उसे रायगुड़ा कैंप स्थित CRPF अस्पताल तक पहुंचाया, जहां मरीज को उपचार के लिए भर्ती कराया गया। समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज का इलाज शुरू किया गया। जवानों की इस पहल ने सुरक्षा बलों के मानवीय पक्ष को सामने ला दिया। बस्तर जैसे दुर्गम और माओवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों के जवान लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं।
स्वतंत्रता दिवस के दौरान भी जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थे। लेकिन ड्यूटी से लौटते समय जब उन्हें एक बीमार ग्रामीण की परेशानी दिखाई दी, तो उन्होंने अपनी थकान की परवाह किए बिना मदद का हाथ बढ़ाया। जिन कंधों पर इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं कंधों ने एक बीमार ग्रामीण को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई उठा ली।
DRG जवानों की पहल की हो रही सराहना
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सुरक्षा बलों की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तक सीमित नहीं है। मुश्किल और दुर्गम इलाकों में कई बार यही जवान आम लोगों के लिए मदद का सबसे भरोसेमंद सहारा बनते हैं। सुकमा की यह तस्वीर सुरक्षा बलों के उस मानवीय चेहरे को सामने लाती है, जहां वर्दी के साथ संवेदना भी दिखाई देती है…एक बीमार ग्रामीण के लिए DRG जवान उस वक्त देवदूत बनकर सामने आए, जब उसे अस्पताल पहुंचाने वाला कोई और साधन उपलब्ध नहीं था।


