रायपुर 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में सोमवार को आने वाला फैसला टल गया है। स्पेशल NIA कोर्ट अब इस मामले में 5 सितंबर 2026 को फैसला सुनाएगी। पहले 31 अगस्त को फैसले की उम्मीद थी। मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अब 10 आरोपियों के खिलाफ फैसला आना बाकी है। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं। दोनों पक्षों की अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
स्पेशल NIA कोर्ट में 10 अगस्त को मामले की अंतिम बहस हुई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोप साबित होने का दावा किया। वहीं, बचाव पक्ष ने अभियोजन के आरोपों और साक्ष्यों को चुनौती दी। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब अदालत ने फैसले की तारीख 5 सितंबर तय की है। झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में हुआ था। उस समय राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे और कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ परिवर्तन यात्रा निकाली थी।
सुकमा में कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। काफिले में करीब 25 वाहन थे और बड़ी संख्या में नेता-कार्यकर्ता मौजूद थे। इसमें तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत पार्टी के कई प्रमुख नेता शामिल थे। काफिला जब झीरम घाटी से गुजर रहा था, तब रास्ते में पेड़ गिराकर उसे रोक दिया गया। इसके बाद नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस हिंसा में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
हमले में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और महेंद्र कर्मा समेत कई कांग्रेस नेताओं की जान गई थी। घटना के बाद पूरे देश में इसकी व्यापक चर्चा हुई थी। झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित नक्सली मामलों में शामिल है। इस मामले में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब फैसला आने की स्थिति बनी है। अभियोजन पक्ष ने मामले में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज अदालत के सामने रखे हैं। अब 5 सितंबर को स्पेशल NIA कोर्ट का फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।


