दुर्ग 10 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 6 साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी चाचा को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मामला माना। मृत्युदंड की अंतिम पुष्टि अब नियमानुसार बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होगी। न्यायालय ने पीड़ित परिवार को आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। दोषी पर संबंधित धाराओं के तहत अर्थदंड और अन्य सजा भी सुनाई गई है। कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में स्पष्ट लिखा है कि अभियुक्त को मृत्युदंड के लिए उसकी गर्दन में रस्सी का फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए।
जानकारी के मुताबिक मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक 6 अप्रैल 2025 को करीब 6 साल 3 महीने की बच्ची पड़ोस में आयोजित कन्या भोज में शामिल होने गई थी। इसके बाद वह लापता हो गई। परिजनों ने तलाश शुरू की और बच्ची के नहीं मिलने पर मोहन नगर थाने में सूचना दी। पुलिस ने तत्काल तलाश शुरू की। उसी रात बच्ची का शव एक कार में मिला। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम में बच्ची के साथ यौन अपराध की पुष्टि हुई। पुलिस और अभियोजन के मुताबिक, वारदात में बच्ची का 24 वर्षीय चाचा दोषी पाया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी उसी घर की छत पर बने कमरे में रह रहा था। अभियोजन के अनुसार, बच्ची रिश्तेदार होने के कारण आरोपी पर भरोसा करती थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ अपराध किया और बाद में उसकी हत्या कर शव को पास खड़ी कार में छिपा दिया।
DNA और फॉरेंसिक साक्ष्य बने अहम कड़ी
इस मामले की जांच में पुलिस ने DNA, FSL, चिकित्सकीय, CCTV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जुटाया। आरोपी के नमूनों समेत घटनास्थल से मिले जैविक और भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराई गई। अभियोजन ने इन वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर के नेतृत्व में थाना प्रभारी शिव चंद्रा और जांच टीम ने बच्ची की तलाश से लेकर साक्ष्य जुटाने और वैज्ञानिक परीक्षण तक की कार्रवाई की। सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने मामले की पैरवी की।
कोर्ट के फैसले के बाद अब हाईकोर्ट में होगी पुष्टि
विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को POCSO Act की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड सुनाया है। इसके अलावा एक अन्य धारा में 5 साल के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है। सभी सजाएं नियमानुसार साथ चलेंगी। हालांकि, मृत्युदंड पर अमल से पहले इसकी पुष्टि हाईकोर्ट से होना जरूरी है। इसके लिए मामला नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के समक्ष जाएगा। छह साल की बच्ची के साथ हुई इस जघन्य वारदात ने रिश्तों में बच्चों की सुरक्षा और भरोसे के सवाल को भी सामने ला दिया था। अदालत का फैसला ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच, मजबूत अभियोजन और त्वरित न्याय की अहमियत को रेखांकित करता है।दुर्ग पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि बच्चों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी या अपराध की जानकारी बिना देरी पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित किए जा सकें।


