दुर्ग 21 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मारपीट के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई घटना को लेकर थाना प्रभारी समेत 8 लोगों के खिलाफ दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस थाना प्रभारी पर खुद पक्षपात और जांच प्रभावित करने के आरोप हैं, उससे मामले की जांच कराना निष्पक्ष न्याय के खिलाफ होगा। अदालत ने मामले की जांच दुर्ग SSP को सौंप दी है। अब SSP किसी स्वतंत्र अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराएंगे।
अधिवक्ता सौरभ चौबे के मुताबिक मामला 10 जून 2025 की रात करीब 10:30 बजे का है। पीड़ित निहाल जसवानी ने अपने साले सूरज ठाकुर के साथ कुछ लोगों को विवाद और मारपीट करते देखा था। बताया गया कि निहाल जब बीच-बचाव के लिए पहुंचा, तो लक्ष्य यादव, राजा यादव और तिलक साहू ने कथित तौर पर उस पर नुकीली वस्तु से हमला कर दिया। इस हमले में निहाल की आंख के पास और पसली में गंभीर चोटें आईं। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।
शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि निहाल का उचित मेडिकल अभिमत लेने के बजाय दूसरे पक्ष के घायल व्यक्ति की मेडिकल क्वेरी कराई गई। इसके बाद पुलिस पर बयानों में कथित हेरफेर कर निहाल और उसके साले के खिलाफ ही अपराध दर्ज करने का आरोप लगाया गया। कुंती यादव नाम की महिला पर भी कथित झूठी FIR और फर्जी शपथ पत्र के जरिए वास्तविक आरोपियों को बचाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की निष्पक्षता को सबसे महत्वपूर्ण माना।
कोर्ट ने कहा कि जब परिवाद में थाना प्रभारी पर ही पक्षपात, बयानों में गड़बड़ी और जांच प्रभावित करने जैसे आरोप हैं, तो उसी अधिकारी से या उसी थाने से जांच कराना उचित नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी दुर्ग SSP को दी है। अदालत के आदेश के बाद अब SSP की निगरानी में किसी स्वतंत्र अधिकारी को जांच सौंपी जाएगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि घटना के मूल तथ्यों के साथ क्या हुआ, मेडिकल कार्रवाई सही तरीके से हुई या नहीं और FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं।
कोर्ट के आदेश से पुलिस महकमे में हलचल
इस आदेश के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं. खास तौर पर यह मुद्दा सामने आया है कि जिस अधिकारी पर ही जांच में पक्षपात का आरोप हो, क्या उसे उसी मामले की जांच की जिम्मेदारी दी जा सकती है ? अब सबकी नजर SSP की निगरानी में होने वाली नई जांच पर है। उसके बाद ही यह साफ होगा कि परिवाद में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और पुलिस कार्रवाई में कहीं कोई गंभीर चूक हुई या नहीं। अदालत के इस आदेश ने एक बात साफ कर दी है कि जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में जांच एजेंसी और जांच अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।


