बलरामपुर 6 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में सड़कों की बदहाली का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रदेश के कई हिस्सों में खराब सड़कों को लेकर आम लोगों की परेशानी और विपक्ष के सवालों के बीच बलरामपुर में जर्जर सड़क को लेकर सरकार के कृषि मंत्री और क्षेत्रीय विधायक रामविचार नेताम भड़क गये और मौके पर ही पूरा काफिला रोककर नाराजगी जताई है। बताया जा रहा है कि मंत्री की गहरी नाराजगी के बाद मंत्री के निर्देश के बाद संबंधित SDO और सब इंजीनियर के निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
दरअसल अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग के नवनिर्माण का काम चल रहा है। निर्माणाधीन मार्ग पर भारी वाहनों और अधिकांश यात्री बसों की आवाजाही जारी है। वहीं निजी चार पहिया वाहनों से अंबिकापुर से बलरामपुर और रामानुजगंज जाने वाले लोग वैकल्पिक मार्ग के तौर पर प्रतापपुर-डवरा-सेमरसोत सड़क का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जिस सड़क को लोगों के लिए वैकल्पिक रास्ता माना जा रहा है, उसकी हालत ही अब परेशानी का कारण बन गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं और कई हिस्सों में डामर की परत उखड़ चुकी है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम विधानसभा क्षेत्र के प्रवास पर थे।
इसी दौरान जब वे प्रतापपुर-डवरा-सेमरसोत मार्ग से गुजर रहे थे तो सड़क की बदहाल स्थिति देखकर मौके पर रुक गए। मंत्री ने ग्रामीणों से बातचीत कर सड़क की स्थिति जानी। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सड़क की पेच रिपेयरिंग और आवश्यक मरम्मत कराई जाती तो सड़क की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने रखरखाव में लापरवाही को सड़क की बदहाली की प्रमुख वजह बताया। मंत्री की नाराजगी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने मौके से ही बलरामपुर कलेक्टर को फोन कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद संबंधित SDO और सब इंजीनियर के निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क की नियमित मरम्मत नहीं होने के कारण शुरुआती दौर में बने छोटे-छोटे गड्ढे धीरे-धीरे बड़े होते गए। कई जगह सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है।मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सड़कों के रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि शासन स्तर से सड़कों की मरम्मत के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, इसलिए समय-समय पर पेच रिपेयरिंग और जरूरी मरम्मत कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
सड़क पर सवाल, सरकार के सामने चुनौती
बलरामपुर की यह सड़क सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं है। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से अलग-अलग इलाकों से जर्जर सड़कों, गड्ढों और खराब रखरखाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। बारिश के दौरान कई सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। सड़कें किसी भी राज्य की बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं। खराब सड़क का सीधा असर आम लोगों के सफर, व्यापार, परिवहन, स्कूली बच्चों और मरीजों की आवाजाही पर पड़ता है। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव को लेकर भी सवाल उठते हैं।
विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मुद्दा
प्रदेश में सड़क की बदहाली को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साधता रहा है। कांग्रेस का आरोप रहा है कि सरकार सड़क निर्माण और विकास के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई इलाकों में लोग आज भी गड्ढों और खराब सड़कों के बीच सफर करने को मजबूर हैं। बलरामपुर में मंत्री की मौके पर नाराजगी और अधिकारियों पर कार्रवाई की पहल को सरकार की ओर से जवाबदेही तय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
लेकिन विपक्ष के लिए यह मामला सरकार से यह सवाल पूछने का मौका भी है कि अगर नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत होती रही होती तो सड़क की यह हालत क्यों बनी ? अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से सड़क की समस्या का स्थायी समाधान होगा, या प्रदेशभर में जर्जर सड़कों के रखरखाव को लेकर सरकार कोई व्यापक व्यवस्था लागू करेगी ? बलरामपुर की सड़क पर मंत्री के एक्शन के बाद यह मुद्दा स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही से आगे बढ़कर प्रदेश में सड़क व्यवस्था और सरकार की विकास नीति पर बहस का मुद्दा बन सकता है।


