मुंबई 5 अगस्त 2026। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अभिनेता खो दिया, जिसकी दमदार आवाज़, प्रभावशाली व्यक्तित्व और खलनायक के किरदारों ने चार दशक तक पर्दे पर अलग पहचान बनाई। हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का 4 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे और मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ भारतीय फिल्म जगत का एक सशक्त अध्याय भी खत्म हो गया।
प्रदीप रावत का जन्म 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। अभिनय की दुनिया में उन्होंने फिल्मों से पहले टेलीविजन के जरिए कदम रखा। बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा का किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर पहचान बनाई। इसके बाद 1985 में फिल्म ‘मेरी जंग’ से बड़े पर्दे पर उनका सफर शुरू हुआ। शुरुआती दौर में छोटे लेकिन असरदार किरदार निभाने वाले प्रदीप रावत ने धीरे-धीरे खुद को इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद चरित्र अभिनेताओं में शामिल कर लिया। साल 1999 में आई ‘सरफरोश’, 2001 की ऑस्कर नामांकित फिल्म ‘लगान’ और फिर ‘गजनी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी।
‘लगान’ में निभाया गया देवा सिंह सोढ़ी का किरदार और ‘गजनी’ में उनका खतरनाक विलेन आज भी दर्शकों के जेहन में जिंदा है। खास बात यह रही कि उन्होंने तमिल फिल्म ‘गजनी’ और उसके हिंदी रीमेक, दोनों में एक ही दमदार किरदार निभाया और दोनों भाषाओं के दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रदीप रावत ने सिर्फ हिंदी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी मजबूत छाप छोड़ी। तेलुगु फिल्म ‘साइ’ में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन (तेलुगु) का पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा उन्हें नंदी और संतोषम जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले।
करीब 40 वर्षों के लंबे करियर में प्रदीप रावत ने 100 से अधिक फिल्मों और कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में काम किया। ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई’, ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘सिंह इज़ ब्लिंग’, ‘छावा’ सहित कई फिल्मों में उनके किरदारों ने यह साबित किया कि एक मजबूत सहायक अभिनेता भी किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। प्रदीप रावत उन चुनिंदा कलाकारों में थे, जिन्होंने कभी स्टारडम के पीछे नहीं भागा, बल्कि हर किरदार को अपनी मेहनत और अभिनय से यादगार बनाया। उनकी गंभीर आवाज़, सशक्त स्क्रीन प्रेजेंस और खलनायकी का अनूठा अंदाज उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल करता है। आज प्रदीप रावत हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा, ‘लगान’ के देवा सिंह सोढ़ी और ‘गजनी’ के खौफनाक विलेन के रूप में उनकी पहचान हमेशा सिनेप्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगी।


