अंबिकापुर 3 सितंबर 2026। सरगुजा जिले में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के काफिले से जुड़ा एक विवाद सामने आया है। आरोप है कि लहपटरा टोल प्लाजा पर मंत्री की कार के ऊपर टोल बैरियर का बूम गिरने के बाद उनके निजी सहायक ओम प्रकाश राजवाड़े ने टोल कर्मचारी के साथ मारपीट की। घटना का CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें टोल कर्मचारी के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। पीड़ित टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े ने पुलिस में शिकायत दी है। उसका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। हालांकि गुरुवार शाम तक आरोपी PA के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होने की बात सामने आई, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के मुताबिक घटना 2 सितंबर की देर रात करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर जा रही थीं। उनके काफिले में दो वाहन थे। आगे चल रही इनोवा टोल प्लाजा से निकल गई। इसके बाद टोल का स्वचालित बूम बैरियर नीचे आ गया और पीछे आ रही मंत्री की फॉर्च्यूनर के ऊपर गिर गया। इससे काफिला रुक गया। आरोप है कि घटना से नाराज मंत्री के PA ओम प्रकाश राजवाड़े सुरक्षाकर्मियों के साथ गाड़ी से उतरे और टोल बूथ पर पहुंचे। यहां टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े से उनकी बहस हुई। इसके बाद PA पर टोलकर्मी को थप्पड़ मारने का आरोप है।
सामने आए CCTV फुटेज में टोल प्लाजा पर कर्मचारी के साथ मारपीट का घटनाक्रम दिखाई देने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारी इस दौरान माफी मांगता रहा। बाद में सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया और PA को वहां से हटाया। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपनी गाड़ी से नहीं उतरीं, वो अंदर ही बैठी रहीं। घटना के अगले दिन 3 सितंबर को पीड़ित टोल कर्मचारी अन्य कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ थाने पहुंचा। उसने PA के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दी। पुलिस ने शिकायतकर्ता का MLC कराया, लेकिन इसके बाद भी FIR दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन करेंगे। इस मामले में अब सवाल सिर्फ टोल बैरियर गिरने का नहीं, बल्कि उसके बाद हुई कथित मारपीट और पुलिस की कार्रवाई का भी है। यदि CCTV फुटेज में मारपीट की घटना रिकॉर्ड हुई है और पीड़ित ने लिखित शिकायत भी दी है, तो पुलिस ने अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं की ? क्या पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे बढ़ रही है ? या आरोपी के खिलाफ कार्रवाई में कोई और वजह है ? फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पहले क्यों गिरा टोल बैरियर
टोल प्रबंधन से जुड़े लोगों के मुताबिक काफिले में आगे चल रही गाड़ी के निकलने के बाद स्वचालित सिस्टम के तहत बूम नीचे आया। पीछे आ रही गाड़ी मंत्री की है, इसकी जानकारी टोल कर्मचारी को नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि काफिले में फॉलो वाहन नहीं होने के कारण कर्मचारी पीछे आ रही कार को तुरंत पहचान नहीं सका। अब इस मामले में टोल बैरियर गिरने की घटना के साथ-साथ टोल कर्मचारी से कथित मारपीट और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर है। मंत्री के PA पर लगे आरोपों को लेकर उनका आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।


