रायपुर 5 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में आज फैसला आने वाला है। 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत इस मामले में अपना निर्णय सुनाएगी। करीब 13 साल पुराने इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि 10 आरोपियों पर आज फैसला आना है।मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। 10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई थी। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने इन आरोपों को चुनौती दी। अंतिम बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
झीरम घाटी केस में अदालत के फैसले का इंतजार जितना कानूनी है, उतना ही राजनीतिक भी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार इस मामले की जांच को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कांकेर में भूपेश बघेल ने एनआईए की जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि दरभा थाने में दर्ज एफआईआर में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा था कि एनआईए कोर्ट के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान दर्ज नहीं किया गया। बघेल ने दावा किया था कि घटना के समय मौके पर मौजूद कई महत्वपूर्ण गवाहों से भी पूछताछ नहीं हुई। ऐसे में अदालत के फैसले के साथ-साथ यह सवाल भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है कि झीरम हमले की जांच कितनी व्यापक और निष्पक्ष तरीके से हुई?
कांग्रेस के बड़े नेताओं पर हुआ था हमला
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में शामिल है। इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से ही इस मामले में दोषियों तक पहुंचने और हमले की पूरी साजिश का खुलासा करने की मांग लगातार उठती रही है। अब करीब 13 साल बाद अदालत के फैसले से इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया एक अहम पड़ाव पर पहुंचने जा रही है। एक तरफ 10 आरोपियों पर आने वाले फैसले का इंतजार है, तो दूसरी तरफ जांच को लेकर उठे राजनीतिक सवाल भी कायम हैं। ऐसे में आज का फैसला झीरम घाटी मामले के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सियासत के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।


