काठमांडू 28 अगस्त 2026। नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील के फटने से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और नए सिरे से बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। खतरे को देखते हुए नेपाल के रसुवा जिले में राहत और बचाव अभियान को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा है। वहीं, भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के आसपास बसे इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 475 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में तीन लोगों की जान गई है। इस तरह दोनों देशों में मृतकों की संख्या 478 तक पहुंच गई है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और राहत-बचाव एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी हैं।
फिर फटी झील, बढ़ा दूसरी बाढ़ का खतरा
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम क्षेत्र के पास बनी झील के फटने के बाद स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। इससे आसपास की नदियों में पानी बढ़ रहा है। इससे पहले भी इस इलाके में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। एक नई बैरियर झील बनने के बाद शुक्रवार को उसके ओवरफ्लो होने से भोटेकोशी नदी में दोबारा तेज बहाव का खतरा पैदा हो गया था।
रसुवा में रेस्क्यू ऑपरेशन अस्थायी तौर पर रोका गया
पानी का स्तर बढ़ने और नए फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए रसुवा जिले में बचाव अभियान को करीब 90 मिनट के लिए रोकने की जानकारी सामने आई है। सुरक्षाबलों और बचाव दलों को भी संवेदनशील इलाकों से हटकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे बसे गांवों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
चीन ने भी रोका राहत अभियान, लेवल-4 अलर्ट
नए खतरे को देखते हुए चीन ने तिब्बत में राहत और बचाव अभियान भी अस्थायी तौर पर रोक दिया है। अधिकारियों ने इलाके में आगे और बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए उच्च स्तर की चेतावनी जारी की है।तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में पहले ही बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। चीन की ओर से राहत और बचाव दलों की तैनाती की गई थी, लेकिन नई झील के कारण पैदा हुए खतरे ने अभियान को और मुश्किल बना दिया है।
सैकड़ों लोगों की तलाश जारी
नेपाल और तिब्बत में बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। ताजा रिपोर्टों में दोनों देशों में 1,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। भारत के लिए भी यह आपदा बड़ी चिंता का विषय है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। भारत सरकार नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास कर रही है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों को लेकर भी चिंता
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रभावित इलाकों में कई विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री फंसे हुए थे। नेपाल में पहले ही कई विदेशी यात्रियों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस प्राकृतिक आपदा में सड़कें, पुल, घर और जरूरी बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में राहत टीमों के पहुंचने में मुश्किल हो रही है। इसी बीच नई झील के फटने और जलस्तर बढ़ने से प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पहले से प्रभावित इलाकों में दोबारा बाढ़ न आए।
फिलहाल नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से नदी किनारे और निचले इलाकों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। राहत और बचाव अभियान के बीच नई झील के फटने से पैदा हुआ खतरा इस आपदा को और गंभीर बना रहा है। अब प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशने के साथ-साथ उन इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना है, जहां दोबारा बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।


