बिलासपुर 17 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि अगर मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि सरकारी नीति में स्पष्ट अयोग्यता होने पर केवल आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देकर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता। यह मामला जशपुर निवासी आदित्य चौहान की याचिका से जुड़ा है। उनके पिता लक्ष्मण दास चौहान पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक थे। कोरोना महामारी के दौरान 23 सितंबर 2020 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद आदित्य ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
आदित्य के आवेदन को सक्षम अधिकारी ने 31 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया। इसकी मुख्य वजह यह बताई गई कि दिवंगत अधिकारी की दूसरी पत्नी उमा तिवारी पहले से सिंचाई विभाग में सहायक वर्ग-3 के पद पर सरकारी सेवा में हैं। आदित्य की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उमा तिवारी उनसे अलग रहती हैं और परिवार को आर्थिक सहायता नहीं देतीं। इसलिए उन्हें परिवार का आर्थिक सहारा नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग की 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला देते हुए कहा कि यदि मृत विवाहित सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से शासकीय सेवा में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं होगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति किसी व्यक्ति का सामान्य रोजगार अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के सामने पैदा हुए अचानक आर्थिक संकट से राहत देना है। हाई कोर्ट ने माना कि नीति में जब पात्रता को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद है, तो केवल इस आधार पर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती कि परिवार का कोई सदस्य अलग रहता है या आर्थिक मदद नहीं करता। अदालत ने आदित्य चौहान की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में परिवार की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सरकारी नीति में तय पात्रता और अयोग्यता की शर्तें भी निर्णायक रहेंगी।


