सरगुजा, 7 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के दावे कर रही है, लेकिन सरगुजा ओलंपिक में सामने आई अव्यवस्था ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सीतापुर ब्लॉक से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे 45 से अधिक खिलाड़ी गुरुवार देर रात तक अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम के बाहर बस का इंतजार करते रहे। खिलाड़ियों को शाम 4 बजे बस से सीतापुर लौटना था, लेकिन रात 11 बजे तक बस नहीं पहुंची। इस दौरान खिलाड़ी भूखे-प्यासे परेशान होते रहे। आखिरकार खिलाड़ियों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को फोन कर अपनी परेशानी बताई। इसके बाद जाकर जिला प्रशासन हरकत में आया और देर रात खिलाड़ियों को वापस भेजने की व्यवस्था किया जा सका।
जानकारी के मुताबिक, सरगुजा ओलंपिक की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए सीतापुर ब्लॉक के 45 से अधिक खिलाड़ी अंबिकापुर पहुंचे थे। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल थे। कई खिलाड़ी स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। गुरुवार को प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद खिलाड़ियों को शाम 4 बजे बस से सीतापुर वापस भेजा जाना था। इसके लिए बस की व्यवस्था की गई थी, लेकिन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद भी बस नहीं पहुंची। खिलाड़ी स्टेडियम के बाहर इंतजार करते रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान आयोजन से जुड़े अधिकारी और प्रभारी भी मौके पर मौजूद नहीं थे। समय बीतता गया और रात करीब 11 बजे तक खिलाड़ियों को वापस ले जाने की व्यवस्था नहीं हो सकी।
लंबे इंतजार के बाद भूख और प्यास से परेशान खिलाड़ियों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को फोन कर अपनी स्थिति बताई। विधायक ने तत्काल सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से बात की और खिलाड़ियों की परेशानी से अवगत कराया। कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव गांधी स्टेडियम पहुंचीं। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए भोजन की व्यवस्था कराई और उन्हें सीतापुर भेजने के लिए दूसरी बस बुलवाई। इसके बाद रात करीब 12 बजे सभी खिलाड़ी बस से रवाना हुए। इस घटना को लेकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने जिला प्रशासन की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
लाखों की फंडिंग, फिर भी खिलाड़ियों को झेलनी पड़ी परेशानी
सरगुजा ओलंपिक के ब्लॉक और जिला स्तरीय आयोजनों के लिए लाखों रुपये की फंडिंग की गई है। प्रतियोगिता में करीब 1800 खिलाड़ियों के शामिल होने की जानकारी है। ऐसे बड़े आयोजन में खिलाड़ियों के आने-जाने, भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आयोजन समिति और संबंधित अधिकारियों की होती है। इसके बावजूद सीतापुर के खिलाड़ियों को देर रात तक बस के इंतजार में भूखे-प्यासे रहना पड़ा।
सवाल यह है कि जब खिलाड़ियों की वापसी के लिए पहले से बस की व्यवस्था तय थी, तो वह समय पर क्यों नहीं पहुंची? आयोजन खत्म होने के बाद खिलाड़ियों की जिम्मेदारी लेने वाला कोई अधिकारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं था ? सरगुजा ओलंपिक का अगला चरण संभाग स्तरीय होगा, जिसमें पूरे संभाग के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ऐसे में जिला स्तरीय आयोजन की इस घटना ने आगामी प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


