रायपुर 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ समेत देशभर में फर्जी SIM और पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर दूरसंचार विभाग ने मोबाइल यूजर्स को अलर्ट किया है। आपके नाम पर जारी कोई SIM साइबर ठगी में इस्तेमाल हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए समय रहते जांच लें कि आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर एक्टिव हैं। मोबाइल SIM अब सिर्फ फोन चलाने का जरिया नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा हथियार बन चुका है। छत्तीसगढ़ में लोगों के पहचान दस्तावेजों का उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस्तेमाल कर अतिरिक्त SIM जारी करने के मामले सामने आने के बाद अब केंद्रीय दूरसंचार विभाग (DoT) ने देशभर के मोबाइल यूजर्स को चेतावनी दी है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर SIM लेना, फर्जी दस्तावेजों से मोबाइल कनेक्शन हासिल करना या अपने नाम पर जारी SIM किसी दूसरे व्यक्ति को धोखाधड़ी के लिए उपलब्ध कराना अपराध है। टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि कई बार ग्राहक को पता ही नहीं होता कि उसके दस्तावेजों पर अतिरिक्त SIM जारी हो चुका है। यही SIM आगे चलकर साइबर ठगी, फर्जी बैंक खातों, OTP आधारित अपराध और दूसरे आपराधिक मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में सामने आए एक मामले में जांच के दौरान पता चला कि 410 से ज्यादा लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर अतिरिक्त SIM जारी किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, एक आरोपी ग्राहकों से बायोमेट्रिक मशीन पर दो बार अंगूठा लगवाता था। एक SIM ग्राहक को दिया जाता, जबकि दूसरा SIM अपने पास रखकर बाद में साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था। यानी आपने खुद SIM नहीं लिया, लेकिन आपके दस्तावेज से जारी नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल हो सकता है। दूरसंचार नियमों के मुताबिक सामान्य तौर पर एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन है। निर्धारित सीमा से अधिक कनेक्शन और संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान के लिए सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से अपने सिस्टम को जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
आपके नाम पर कितने SIM हैं, ऐसे करें चेक
मोबाइल यूजर्स को संचार साथी पोर्टल/ऐप के जरिए यह जांचने की सुविधा दी गई है कि उनके नाम पर कितने मोबाइल नंबर एक्टिव हैं।क्या करें ?
- संचार साथी पोर्टल पर जाएं।
- अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन/वेरिफिकेशन करें।
- अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की सूची देखें।
- अगर कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे आपने नहीं लिया है, तो उसकी रिपोर्ट करें।
- संदिग्ध नंबर के बारे में तुरंत संबंधित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करें।
ध्यान रखें—सिर्फ नंबरों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। सूची में मौजूद हर नंबर को पहचानना जरूरी है।
IMEI से छेड़छाड़ भी अपराध
दूरसंचार विभाग ने सिर्फ SIM को लेकर ही चेतावनी नहीं दी है। मोबाइल हैंडसेट के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करना या बदले हुए IMEI वाले फोन का इस्तेमाल करना भी गैरकानूनी है। इसी तरह कॉल करते समय वास्तविक नंबर छिपाकर किसी दूसरे व्यक्ति का नंबर दिखाना यानी कॉलिंग आईडी में हेरफेर (CLI spoofing) भी कार्रवाई के दायरे में आता है। सरकार के मुताबिक ऐसी गतिविधियां टेलीकॉम नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
रायपुर का मामला क्यों है बड़ा अलर्ट ?
छत्तीसगढ़ के रायपुर में सामने आया मामला आम मोबाइल यूजर्स के लिए खास चेतावनी है। पुलिस जांच में कथित तौर पर सामने आया कि ग्राहकों से दस्तावेज और बायोमेट्रिक लेने के दौरान उनके अंगूठे का दो बार इस्तेमाल किया जाता था। एक कनेक्शन ग्राहक को देने के बाद दूसरा उसी पहचान पर जारी कर लिया जाता था। जांच में ऐसे 410 से ज्यादा अतिरिक्त SIM जारी होने की बात सामने आई। आरोप है कि इन SIM को आगे साइबर ठगों तक पहुंचाया गया। इस तरह का मामला यह बताता है कि SIM लेते समय भी अपनी बायोमेट्रिक प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी है।
साइबर ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा
पुलिस की कार्रवाई के अनुसार पिछले एक साल में फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाने, SIM जारी कराने और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में करीब 400 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। इस नेटवर्क से जुड़े 3,000 से ज्यादा बैंक खातों को होल्ड कराया गया और इन खातों से करीब ₹60 करोड़ की ठगी से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
सरकार का नया डिजिटल इंटेलिजेंस सिस्टम क्या करेगा ?
सरकार ने संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए Digital Intelligence Platform को मजबूत किया है। 23 अगस्त से इसमें नया फीचर जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। इस व्यवस्था के जरिए निर्धारित सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन रखने वाले मामलों की पहचान में मदद मिलेगी। फोटो और अन्य उपलब्ध विवरणों का मिलान भी किया जा सकेगा। टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को सरकारी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी 5 सावधानियां
1. अपने नाम पर जारी SIM की नियमित जांच करें।
2. अनजान नंबर दिखाई दे तो तुरंत रिपोर्ट करें।
3. SIM लेते समय बायोमेट्रिक प्रक्रिया पर नजर रखें।
4. अपना आधार/पहचान दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति या दुकान पर बिना जरूरत साझा न करें।
5. अपने नाम का SIM किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
Bottom Line
आपके नाम पर चल रहा अनजान SIM सिर्फ एक मोबाइल नंबर नहीं है—वह साइबर अपराध में इस्तेमाल होने पर आपको जांच के दायरे में ला सकता है। इसलिए आज ही जांचें कि आपके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन एक्टिव हैं। अगर कोई नंबर आपका नहीं है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल रिपोर्ट करें।


