बिलासपुर 21 सितंबर 2026। न्यायधानी में गणेश उत्सव के दौरान डीजे पर नाचने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। गतौरा के जनक पहरी इलाके में दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। आरोप है कि इस दौरान तलवार, चाकू, लाठी-डंडे, लोहे की रॉड और पत्थरों से हमला किया गया। हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल शैलेष कुमार राठौर की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि परिवार के कई लोग घायल हैं। पुलिस ने मामले में 14 संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इस घटना ने गणेश उत्सव समेत धार्मिक आयोजनों में डीजे के इस्तेमाल, पुलिस निगरानी और कानून-व्यवस्था की तैयारियों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच गतौरा के जनक पहरी इलाके में गणेश पंडाल में डीजे बज रहा था। इसी दौरान नाचने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। परिजनों का कहना है कि दोनों पक्षों में पहले से भी विवाद चला आ रहा था। कहासुनी के बाद मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि इस दौरान तलवार, चाकू, लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला किया गया। पथराव की बात भी सामने आई है। हमले में शैलेष कुमार राठौर गंभीर रूप से घायल हुआ। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना में मृतक के पिता व्यास नारायण राठौर और बड़े भाई रवि कुमार राठौर के घायल होने की जानकारी सामने आई है। बीच-बचाव करने पहुंचे विक्रम राठौर और विकास राठौर भी घायल बताए जा रहे हैं।
घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका सिम्स में इलाज जारी है। मृतक की पत्नी ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके बच्चे अनाथ हो गए हैं और आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। घटना की सूचना मिलते ही मस्तूरी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने अब तक 14 संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। परिजनों ने बड़ी संख्या में लोगों के हमले में शामिल होने का दावा किया है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका रही। एडिशनल एसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह ने भी सोमवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली।
हाईकोर्ट की सख्ती के बीच फिर उठा DJ नियंत्रण का सवाल
बिलासपुर में हुई इस वारदात के बीच डीजे को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के हालिया सख्त रुख की भी चर्चा हो रही है। अगस्त 2026 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नया कानून लंबित होने को मौजूदा कानून और सरकारी निर्देशों के पालन में ढिलाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मौजूदा प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले अगस्त 2025 में भी हाईकोर्ट ने त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में डीजे-साउंड सिस्टम से होने वाले शोर को लेकर राज्य सरकार से प्रभावी तरीके से कोलाहल नियंत्रण अधिनियम लागू करने को कहा था। अदालत ने उस समय सरकार को नियम लागू करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था।
पुलिस-प्रशासन की निगरानी पर उठ रहे सवाल
हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान राज्य की ओर से बिलासपुर में डीजे संचालकों के साथ बैठक, अनुमति और निर्धारित ध्वनि सीमा में साउंड सिस्टम चलाने के निर्देश तथा उल्लंघन पर कार्रवाई की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई थी। सितंबर 2024 के सरकारी रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि अधिकारियों को शिकायत का इंतजार किए बिना ध्वनि प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद गणेश उत्सव के दौरान डीजे को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक संघर्ष और फिर हत्या तक पहुंच गया।
यह मामला अब केवल आपसी विवाद और हत्या की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि धार्मिक आयोजनों में डीजे की अनुमति, समय, ध्वनि सीमा और पुलिस निगरानी के नियम जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर संदेहियों से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस पुराने विवाद, डीजे पर नाचने को लेकर तत्काल हुए विवाद और उसके बाद हुई मारपीट के पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। इस मामले में डीजे विवाद को हत्या की पृष्ठभूमि में एक अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन हत्या के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदारी और घटना में प्रत्येक आरोपी की भूमिका जांच के बाद ही तय होगी।


