नई दिल्ली 15 सितंबर 2026। UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर भी जेब ढीली होगी ? केंद्र सरकार ने फिलहाल ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट को शुल्क से बाहर रखा है। लेकिन नए नियम ने ₹2,000 से ऊपर के बड़े मर्चेंट पेमेंट पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना का रास्ता जरूर खोल दिया है। वित्त मंत्रालय के नए प्रावधान के मुताबिक ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकते। यानी रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए फिलहाल राहत बरकरार रहेगी।
नरेंद्र मोदी जनता से वसूली का नया प्लान लाए हैं। अब ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर सरकार वसूली करेगी।
प्लान है कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI पेमेंट पर 0.5% चार्ज वसूला जाए, मतलब –
• अगर आपने ₹5,000 की खरीदारी की तो ₹25 का चार्ज लगेगा
• अगर ₹10,000 की खरीदारी की तो ₹50 वसूला जाएगापहले UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री था, लेकिन नरेंद्र मोदी से ये देखा नहीं गया और यहां भी वसूली का खेल शुरू कर दिया।
मोदी का फंडा साफ है – जितना हो सके जनता को लूट लो और अपने मित्र की तिजोरी भरो।
ये सरकार जनता की सरकार नहीं है, ये चंद उद्योगपतियों की सरकार है और नरेंद्र मोदी उनके एजेंट।
— Congress (@INCIndia) September 15, 2026
लेकिन इसी फैसले का दूसरा पहलू अब चर्चा में है। पहले UPI के सभी भुगतान को शुल्क से बाहर रखने की व्यवस्था थी। अब ₹2,000 की सीमा तय होने के बाद बड़े मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू किए जाने की गुंजाइश बन गई है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि कितना शुल्क लगेगा और कब से लगेगा। यही सवाल आम UPI यूजर को परेशान कर रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों और चर्चाओं में 0.3 से 0.5 फीसदी तक MDR की संभावित दर की बात सामने आ रही है। अगर 0.5 फीसदी की दर लागू होती है, तो ₹5,000 के मर्चेंट पेमेंट पर ₹25 और ₹10,000 के पेमेंट पर ₹50 का शुल्क बन सकता है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अभी संभावित गणना है, सरकार की घोषित शुल्क दर नहीं। बड़े UPI पेमेंट पर वास्तव में कितना MDR लगेगा, इसका अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।
ग्राहक से सीधे वसूली होगी या दुकानदार देगा ?
यहां एक और महत्वपूर्ण सवाल है। MDR और ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला UPI चार्ज एक ही चीज नहीं हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन को लेकर आम यूजर से शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं की गई है। चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार को होने वाले बड़े डिजिटल पेमेंट पर संभावित MDR की है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर भविष्य में MDR लागू होता है, तो बड़ा सवाल यह होगा कि उसका आर्थिक बोझ दुकानदार उठाएगा या किसी तरीके से ग्राहक तक पहुंचेगा।
कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला
सरकार के इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर आरोप लगाया कि ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.5 फीसदी तक चार्ज लगाने की तैयारी है और इसे जनता से वसूली का नया तरीका बताया। कांग्रेस ने उदाहरण देते हुए कहा कि ₹5,000 की खरीदारी पर ₹25 और ₹10,000 की खरीदारी पर ₹50 तक का चार्ज लगाया जा सकता है। कांग्रेस ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला बोला है। हालांकि, कांग्रेस द्वारा बताई गई 0.5 फीसदी दर फिलहाल लागू शुल्क नहीं है। बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर वास्तविक MDR की दर और उसके लागू होने को लेकर अंतिम व्यवस्था का इंतजार है।
छोटे दुकानदारों को राहत, बड़े डिजिटल पेमेंट पर नजर
सरकार के फैसले का सीधा फायदा छोटे दुकानदारों और कम राशि वाले डिजिटल भुगतान को मिलता दिख रहा है। लेकिन कारोबारियों के लिए बड़ी रकम के डिजिटल पेमेंट की लागत भविष्य में बदल सकती है। यही वजह है कि अब बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि ‘UPI फ्री रहेगा या नहीं’, बल्कि असली सवाल यह है कि बड़े UPI पेमेंट की लागत कौन उठाएगा ? फिलहाल तस्वीर साफ है—₹2,000 तक का UPI पेमेंट शुल्कमुक्त रहेगा, लेकिन ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भविष्य में MDR की संभावना ने जनता और कारोबारियों के बीच नई चिंता जरूर पैदा कर दी है।


