रायपुर 9 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के पहिए थमने का खतरा मंडरा रहा है। डीजल की बढ़ती कीमत और लंबे समय से यात्री किराए में बढ़ोतरी नहीं होने से नाराज बस ऑपरेटरों ने 22 सितंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। अगर सरकार और परिवहन विभाग ने समय रहते उनकी मांगों पर फैसला नहीं लिया, तो प्रदेशभर में यात्री बसों का संचालन बंद हो सकता है। बसों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ेगा। रोजाना बस से दफ्तर, कॉलेज, अस्पताल, कारोबार और दूसरे शहरों तक आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के यात्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक परिवहन की होगी।
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली का आरोप है कि बस संचालक लंबे समय से अपनी समस्याएं सरकार और परिवहन विभाग के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं हुई। महासंघ के मुताबिक, करीब तीन साल से अधिकारियों और बस ऑपरेटरों के बीच कोई बैठक नहीं हुई है। वहीं यात्री किराया बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर करीब चार महीने पहले परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और कर्मचारियों से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद यात्री किराया लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है। ऐसे में मौजूदा किराए पर बसों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है।
हड़ताल हुई तो सबसे ज्यादा असर यात्रियों पर
बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच मांगों को लेकर चल रहे गतिरोध का सबसे बड़ा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ सकता है। प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग रोजाना बसों के जरिए जिला मुख्यालय, शहरों और ग्रामीण इलाकों के बीच सफर करते हैं। 22 सितंबर से बस सेवा बंद होने की स्थिति में यात्रियों को टैक्सी, ऑटो या निजी वाहनों पर निर्भर होना पड़ेगा। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए परेशानी और बढ़ सकती है। वहीं ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन बंद होने से उन लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी, जिनके पास सार्वजनिक परिवहन के अलावा आने-जाने का दूसरा आसान विकल्प नहीं है।
किराया बढ़ाने समेत 9 मांगें
बस महासंघ ने सरकार के सामने कुल 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें यात्री किराए में बढ़ोतरी प्रमुख है। ऑपरेटरों ने बसों में सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लागू करने और ई-बसों का संचालन शहर की सीमा तक सीमित रखने की मांग की है। इसके अलावा ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण क्षेत्रों और बस स्टैंडों से संचालन पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। बस संचालकों ने स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित अंतर रखने की मांग की है। साथ ही VLTD डिवाइस के रिन्यूअल शुल्क में कमी और मैनुअल फिटनेस की सुविधा देने की मांग भी रखी गई है। दूसरे जिले या राज्य में बस चलाने के लिए परमिट पर दोबारा मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने और सभी बसों के लिए ऑनलाइन परमिट सुविधा शुरू करने की मांग भी महासंघ ने की है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
बस ऑपरेटरों की मांगें अगर लंबित रहती हैं और 22 सितंबर से हड़ताल होती है, तो सरकार के सामने एक साथ दो चुनौतियां होंगी—बस संचालकों की नाराजगी दूर करना और आम यात्रियों के लिए परिवहन व्यवस्था बनाए रखना। फिलहाल बस ऑपरेटरों ने साफ कर दिया है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो वे प्रदेशभर में बसों का संचालन बंद कर देंगे। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार और परिवहन विभाग की अगली पहल पर है।



