रायपुर 8 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य और तारा कोल ब्लॉक का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर हसदेव क्षेत्र में खनन और पर्यावरण को लेकर सवाल उठाए, तो भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों और तत्कालीन केंद्र सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा कर दिया। हसदेव को लेकर छिड़ी इस नई राजनीतिक जंग में एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार पर पर्यावरण और जंगलों के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल और केंद्र में अपनी सरकार के दौरान लिए गए फैसलों का हिसाब देना चाहिए।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर मुख्यमंत्री साय पर तीखा हमला बोलते हुए सरकार पर सवाल उठाये थे। बघेल ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ के जंगलों और पर्यावरण की कीमत पर अडानी समूह को फायदा पहुंचाया जा रहा है। भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को बधाई दी और कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ को ‘अडानीगढ़‘ बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के इस बयान के बाद अब बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने भूपेश बघेल के आरोपों को राजनीतिक विरोधाभास करार दिया।
पाण्डेय ने दावा किया कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर प्रक्रिया की शुरुआत कांग्रेस नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुई थी। भाजपा नेता ने तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश के 23 जून 2011 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि तारा कोल ब्लॉक को उस समय ‘स्टेज-1’ पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। भाजपा का तर्क है कि जिस प्रक्रिया को लेकर आज कांग्रेस सवाल उठा रही है, उसकी शुरुआती कड़ियां उसी दौर से जुड़ी हैं। यही भाजपा के पलटवार का सबसे बड़ा राजनीतिक बिंदु है—कांग्रेस के वर्तमान विरोध को उसके पुराने फैसलों से जोड़कर सवाल खड़ा करना।
भूपेश सरकार के पांच साल भी BJP के निशाने पर
भाजपा ने केवल तत्कालीन केंद्र सरकार के फैसलों का हवाला देकर ही पलटवार नहीं किया, बल्कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के पांच साल के कार्यकाल को भी बहस के केंद्र में ला दिया। संतोष पाण्डेय ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और खनन से जुड़े फैसलों पर कांग्रेस का रुख अलग था। भाजपा का कहना है कि सत्ता में रहते हुए जिन नीतियों और फैसलों को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति नहीं जताई, सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हीं मुद्दों को राजनीतिक आंदोलन का रूप देना दोहरे मापदंड को दर्शाता है। हालांकि, ये भाजपा के आरोप हैं, जिन पर कांग्रेस की ओर से जवाब आना बाकी है।
तारा कोल ब्लॉक की ई-नीलामी को BJP ने बनाया बचाव का आधार
तारा कोल ब्लॉक के मौजूदा आवंटन को लेकर भी भाजपा ने अपना पक्ष रखा है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान आवंटन खुली और प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है। हालांकि भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि नीलामी या आवंटन अपने आप में खनन शुरू करने की अनुमति नहीं है। खनन गतिविधियां शुरू करने से पहले आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरियां हासिल करना अनिवार्य होगा। यानी सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश है कि विकास और खनन की प्रक्रिया पर्यावरणीय नियमों के दायरे में ही आगे बढ़ेगी।
हसदेव विवाद में भाजपा ने सरकार के बचाव के लिए प्रदेश में वन एवं वृक्ष आवरण बढ़ने का दावा भी सामने रखा है। संतोष पाण्डेय ने इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2023 का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि का दावा किया। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी के मुताबिक औद्योगिक और खनन गतिविधियों को पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए ही आगे बढ़ाया जाएगा।
सियासी लड़ाई में बदल गया पर्यावरण का मुद्दा
हसदेव अरण्य का सवाल अब केवल जंगल और खनन तक सीमित नहीं रह गया है। यह भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई भी बन चुका है। भूपेश बघेल की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार पर सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा ने जवाब में कांग्रेस के पुराने फैसलों, तत्कालीन केंद्र सरकार की पर्यावरणीय मंजूरियों और भूपेश सरकार के पांच साल के कार्यकाल को मुद्दा बना दिया है। राजनीतिक तौर पर भाजपा की रणनीति साफ दिखाई देती है, भूपेश बघेल के आरोपों का जवाब वर्तमान सरकार के फैसलों से देने के साथ-साथ कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड को भी बहस में लाना। वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह भाजपा के इन आरोपों का जवाब दे और यह स्पष्ट करे कि उसके अनुसार वर्तमान सरकार की हसदेव नीति में ऐसी क्या बात है, जिस पर वह आपत्ति जता रही है।
हसदेव अरण्य और तारा कोल ब्लॉक पर आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आरोपों के बाद भाजपा ने आक्रामक पलटवार कर दिया है। अब राजनीतिक नजरें कांग्रेस के अगले जवाब पर टिकी हैं। कुल मिलाकर हसदेव का मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘पर्यावरण बनाम विकास’ से आगे बढ़कर ‘किसकी सरकार में क्या फैसला हुआ’ की राजनीतिक बहस में बदलता दिखाई दे रहा है। आगामी दिनों में दोनों दल अपने-अपने दावों और पुराने फैसलों के आधार पर इस मुद्दे को और धार दे सकते हैं।


