रायपुर27 अगस्त 2026। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में परीक्षाओं की गोपनीयता और परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएससी फर्स्ट ईयर के फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से करीब पांच घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला सामने आया है। 19 अगस्त को सुबह 10 बजे होने वाली परीक्षा का प्रश्नपत्र तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच विद्यार्थियों तक पहुंच गया। परीक्षा समाप्त होने के बाद वायरल पीडीएफ और मूल प्रश्नपत्र का मिलान किया गया, तो दोनों में सवाल एक जैसे पाए गए। यानी सवाल सिर्फ मिलता-जुलता नहीं था, बल्कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्नपत्र से उसका मिलान होने की बात सामने आई है।
पेपर लीक की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने भारतीय कृषि महाविद्यालय को भेजे गए और बाद में विश्वविद्यालय को वापस मिले प्रश्नपत्रों के लिफाफों की जांच की। जांच के दौरान लिफाफे में छेड़छाड़ के निशान मिले। बताया गया है कि ये निशान पहले सामने आए पेपर लीक मामले की पुलिस जांच में मिले छेड़छाड़ के निशानों से मिलते-जुलते थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने संबंधित थाना प्रभारी को पत्र लिखकर मामले में पुलिस विवेचना कराने का अनुरोध किया है।
20 दिनों में तीसरा मामला, परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रश्नपत्र परीक्षा से कई घंटे पहले सोशल मीडिया तक कैसे पहुंच रहा है? अगर प्रश्नपत्रों को सीलबंद और सुरक्षित रखने की व्यवस्था है, तो बार-बार गोपनीय दस्तावेज बाहर कैसे आ रहे हैं ? IGKV में करीब 20 दिनों के भीतर पेपर लीक का यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। इससे पहले 20 अगस्त को एंटोमोलॉजी यानी कीट विज्ञान का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले वायरल हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा निरस्त कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने एक प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया कि इसी गिरोह ने 7 अगस्त को आयोजित बीएससी फर्स्ट ईयर प्लांट पैथोलॉजी का प्रश्नपत्र भी लीक किया था।
अब जेनेटिक्स की परीक्षा पर फैसला
विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी संजय नैय्यर के मुताबिक, जेनेटिक्स की परीक्षा निरस्त की जाए या नहीं, इस पर अंतिम फैसला गुरुवार को लिया जाएगा। परीक्षा रद्द होने की स्थिति में नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। वहीं, एंटोमोलॉजी और प्लांट पैथोलॉजी की रद्द परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएंगी। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन ही नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा सिस्टम की निगरानी और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल विद्यार्थियों के भविष्य का भी है—अगर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र बाहर पहुंच रहा है, तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ न्याय कैसे होगा ? अब निगाह इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जेनेटिक्स परीक्षा को लेकर क्या फैसला करता है और पुलिस जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की पूरी कड़ी सामने आती है या नहीं।


