बिलासपुर 21 अगस्त 2026। न्यायधानी बिलासपुर में एक NDPS मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने DGP से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने खास तौर पर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जिस पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर FIR दर्ज हुई, उसी अधिकारी को मामले की जांच और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई। कोर्ट ने DGP से संबंधित अधिकारी के पिछले आचरण के बारे में भी व्यक्तिगत हलफनामा देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी।
जानकारी के मुताबिक मामला सरकंडा थाना क्षेत्र में 2925 क्लोनाजेपाम यानी रिवोट्रिल टैबलेट की कथित बरामदगी से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक इन टैबलेट का कुल वजन करीब 438.750 ग्राम था। इस मामले में पुलिस ने महिला के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21(C) और 22 के तहत मामला दर्ज किया गया और बाद में चार्जशीट भी पेश की गई। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि महिला को पारिवारिक विवाद की वजह से साजिश के तहत महिला को फंसाये जाने की दलील दी गयी। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक प्रतिबंधित दवाओं वाला बैग महिला को सीधे नहीं मिला था। करीब 14 साल के एक बच्चे को पतंग उड़ाते समय घर की छत पर एक पॉलीथिन बैग मिला था। परिवार का कहना है कि बच्चे ने मोबाइल पर बैग में रखी दवाओं के बारे में जानकारी जुटाई और अपनी मां को बताया।
इसके बाद उसे अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे वाली जगह पर रख दिया गया। पुलिस ने 15 फरवरी 2026 की सुबह करीब 7:35 बजे घर में तलाशी ली। छत पर कुछ नहीं मिलने के बाद सीढ़ियों के पास रखा वही बैग बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार उसमें 2925 क्लोनाजेपाम टैबलेट थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि महिला और उसके पति के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा है। भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी, वसूली और तलाक से जुड़े मामले भी चल रहे हैं। याचिका में यह आशंका जताई गई कि इसी पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमि में महिला को कथित तौर पर फंसाने के लिए उसके घर में प्रतिबंधित दवाओं का बैग रखा गया हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि छापे से पहले महिला के पति और उसके एक रिश्तेदार की कथित मौजूदगी सरकंडा थाने में थी, जिसकी जांच की जानी चाहिए।
14 साल के बच्चे को थाने में रखने का भी आरोप
याचिका में पुलिस पर यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्चे के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं होने के बावजूद उसे करीब 10 घंटे तक थाने में रखा गया। परिवार का कहना है कि बच्चे ने लगातार बताया कि बैग उसे छत पर मिला था और बाद में उसने खुद उसे सीढ़ियों के पास रखा था। याचिकाकर्ताओं ने बैग के स्रोत, उसे छत तक पहुंचाने वाले व्यक्ति और घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बच्चे का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
हाईकोर्ट ने DGP से पूछे दो सीधे सवाल
कोर्ट ने DGP से मुख्य रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि—
पहला- देहाती नालिश दर्ज करने वाले अधिकारी शैलेंद्र सिंह को ही आगे मामले की जांच करने की अनुमति कैसे दी गई ?
दूसरा- उसी अधिकारी ने जांच पूरी कर महिला के खिलाफ चार्जशीट कैसे पेश कर दी ?
कोर्ट ने अधिकारी के पूर्व आचरण को लेकर भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
अब नजर 24 अगस्त की सुनवाई पर
हाईकोर्ट ने संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में स्वयं या वकील के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। नोटिस की तामील वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से कराने को कहा गया है। फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले की मेरिट पर अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन जांच की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवाल पुलिस के लिए गंभीर हैं। अब 24 अगस्त की सुनवाई में DGP का हलफनामा यह साफ कर सकता है कि एक ही अधिकारी के शिकायतकर्ता और जांचकर्ता की भूमिका निभाने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।


