बिलासपुर 4 अगस्त 2026। बिलासपुर में एक निर्माणाधीन मकान पर काम के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कस्तूरबा नगर रिंग रोड नंबर-2 स्थित निर्माणाधीन भवन में 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद जांच में यह खुलासा हुआ है कि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण की शिकायत करीब तीन महीने पहले नगर निगम से की गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस के मुताबिक सरकंडा के अशोक नगर निवासी भूपेंद्र साहू और रवि बंजारे मंगलवार दोपहर निर्माणाधीन मकान में काम करने पहुंचे थे। इसी दौरान भूपेंद्र का संपर्क भवन के ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन से हो गया। साथी को बचाने के लिए दौड़े रवि भी करंट की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि एक मजदूर नीचे गिर पड़ा, जबकि दूसरा बिजली के तार में ही फंस गया। स्थानीय लोगों ने बिजली सप्लाई बंद कराने की कोशिश की, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस, नगर निगम, सीएसईबी और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया है कि संबंधित भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किए जाने की शिकायत करीब तीन महीने पहले नगर निगम को दी गई थी। बावजूद इसके न तो निर्माण रोका गया और न ही सुरक्षा मानकों की जांच की गई। अब हादसे के बाद निगम की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि निर्माण के दौरान हाईटेंशन लाइन से सुरक्षित दूरी के नियमों का पालन किया गया था या नहीं। सामान्य तौर पर ऐसी लाइन के नीचे निर्माण कार्य से पहले बिजली विभाग से अनुमति लेना, आवश्यकता पड़ने पर लाइन बंद कराना और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन नियमों की अनदेखी ही हादसे की वजह बनी। मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में श्रमिकों की मौजूदगी को लेकर अलग-अलग बयान मिले हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि दोनों मजदूर काम पर आए थे, जबकि अन्य श्रमिकों ने दावा किया कि वे काम शुरू ही नहीं किए थे। पुलिस ने यह भी पाया कि दोनों के कपड़े साफ थे और उन पर सीमेंट के निशान नहीं थे। ऐसे में पुलिस अब घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।फिलहाल पुलिस भवन मालिक, ठेकेदार, नगर निगम और बिजली विभाग की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में जांच कर रही है। यदि निर्माण नियमों, सुरक्षा मानकों या विभागीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और विभागीय निगरानी की गंभीर जरूरत को सामने लेकर आया है।


