Health Tips: अगर आपके घर में कोई दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन या अन्य गंभीर बीमारी की दवा नियमित रूप से लेता है, तो यह खबर राहत देने वाली है। केंद्र सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 23 जरूरी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (Retail Price) तय कर दिए हैं। इसके बाद अब कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर इन दवाओं को तय कीमत से अधिक पर नहीं बेच सकेगा। यह फैसला औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013 के तहत जारी अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है। NPPA ने स्पष्ट किया है कि तय किए गए दाम GST के बिना हैं। यानी मरीजों से निर्धारित कीमत के अलावा केवल लागू जीएसटी ही लिया जा सकेगा।
किन मरीजों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा ?
नई मूल्य सूची में हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन, एंग्जायटी, एनीमिया, संक्रमण, बुखार, दर्द और महिलाओं में पीसीओएस जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 23 दवाएं शामिल हैं। इनमें एटोरवास्टेटिन, क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन, टेल्मिसार्टन, मेटोप्रोलोल, सिटाग्लिप्टिन, मेटफॉर्मिन, क्लोनाजेपाम, पैरोक्सेटीन और डापाग्लिफ्लोजिन जैसे कई कॉम्बिनेशन शामिल हैं, जिनका बड़ी संख्या में मरीज नियमित इस्तेमाल करते हैं।
कंपनियों को सख्त निर्देश
NPPA ने दवा कंपनियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे इन दवाओं की बिक्री तय खुदरा मूल्य से अधिक पर नहीं करेंगी। यदि कोई कंपनी अगले 12 महीनों के भीतर इन्हीं फॉर्मूलेशन की नई दवा बाजार में लाती है, तो उसे भी इसी मूल्य सीमा का पालन करना होगा। कंपनियों को नई प्राइस लिस्ट जारी कर NPPA और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रकों को उपलब्ध करानी होगी।
नियम तोड़ा तो होगी कानूनी कार्रवाई
प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी तय कीमत से अधिक राशि वसूलती है या आदेश का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ DPCO-2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अतिरिक्त वसूली गई राशि ब्याज सहित जमा करानी होगी।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि हार्ट, बीपी और डायबिटीज जैसी बीमारियों के मरीजों को हर महीने नियमित रूप से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे में NPPA के इस फैसले से दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता आएगी, मनमाने दामों पर रोक लगेगी और मरीजों को राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य जरूरी दवाओं को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखना और इलाज का खर्च कम करना है।

