जांजगीर-चांपा, 2 अगस्त 2026। जांजगीर-चांपा जिले में अंधविश्वास फैलाकर छात्रों के बीच डर फैलाना एक शिक्षिका को भारी पड़ गया। बताया जा रहा है कि शिक्षिका ने अपनी गुम हुई सोने की बाली को खोजने के लिए न केवलस्कूल परिसर में अंधविश्वास का सहारा लिया, बल्कि बाली की जानकारी नहीं देने पर छात्रों को गंभीर बीमारी का डर भी बताया गया। इस मामले में डीईओं ने सख्त एक्शन लेते हुए शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक मामला बलौदा विकासखंड के काठापाली प्राथमिक स्कूल का है। 31 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें शिक्षिका लाल कपड़े में नारियल, चावल और मौली का धागा लेकर छात्रों के बीच पहुंची थीं। वीडियो में वह गुम हुई सोने की बाली के बारे में जानकारी देने के लिए बच्चों पर दबाव बनाती नजर आईं। आरोप है कि शिक्षिका ने बच्चों से कहा कि यदि किसी को बाली के बारे में जानकारी है और वह नहीं बताएगा, तो उसे उल्टी, दस्त और अन्य बीमारियों जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शिक्षिका की इन बातों से बच्चे घबरा गए और घर पहुंचकर पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। बलौदा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने जांच कर शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया। हालांकि, निर्धारित समय सीमा में उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने शिक्षिका गीता कुम्भकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय बलौदा निर्धारित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और सुरक्षित माहौल का स्थान हैं। ऐसे में अंधविश्वास को बढ़ावा देने या छात्रों को भयभीत करने जैसी गतिविधियां न केवल शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि स्कूलों में अंधविश्वास फैलाने या बच्चों पर मानसिक दबाव बनाने जैसी घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

