कवर्धा 2 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के अमेरा आदिवासी कन्या छात्रावास में 7वीं कक्षा की छात्रा की मौत के मामले में आदिवासी विकास विभाग ने छात्रावास की अधीक्षिका को हटा दिया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। मृत छात्रा के परिजनों का कहना है कि सिर्फ अधीक्षिका को हटाने से न्याय नहीं मिलेगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जानकारी के मुताबिक अमेरा आदिवासी कन्या छात्रावास में रहने वाली बबिता पन्द्राम की 27 जुलाई की रात अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। परिजनों का आरोप है कि उस समय छात्रावास की अधीक्षिका मौजूद नहीं थीं और छात्रा को समय पर अस्पताल भी नहीं पहुंचाया गया। उनका दावा है कि इलाज में हुई देरी के कारण छात्रा की जान चली गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना की जानकारी उन्हें रात में नहीं दी गई। उन्हें अगले दिन सुबह छात्रा की मौत की सूचना मिली।
परिवार का कहना है कि यदि समय रहते सूचना और इलाज मिला होता, तो शायद बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद आदिवासी विकास विभाग ने छात्रावास अधीक्षिका श्वेता उईके को उनके पद से हटा दिया है। लेकिन मृत छात्रा के परिजनों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता है। उनका आरोप है कि मामले में कई स्तरों पर लापरवाही हुई है, इसलिए केवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। परिजनों ने मांग की है कि छात्रा की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि उपचार में देरी क्यों हुई, घटना की सूचना समय पर क्यों नहीं दी गई और इस पूरी घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। इस घटना ने एक बार फिर आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्थाओं और ट्राइबल विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भी मामले को लेकर नाराजगी है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभागीय कार्रवाई केवल अधीक्षिका को हटाने तक सीमित रहती है या जांच के बाद छात्रा की मौत के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाती है।

